बेंगलुरु: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को बड़ी कार्रवाई की। ED के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत कर्नाटक और गुजरात के 21 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच का दायरा KPSC के अधिकारियों, निजी डिजिटल मूल्यांकन कंपनी, कथित बिचौलियों और भर्ती परीक्षा में चयनित कुछ उम्मीदवारों तक फैला हुआ है।
KPSC के निलंबित अध्यक्ष और आयोग की सदस्य के ठिकानों पर भी तलाशी
ED की टीमों ने बेंगलुरु स्थित KPSC मुख्यालय के अलावा आयोग के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार के आवास और आयोग की सदस्य शांता होसमानी से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली। इसके अलावा पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन से जुड़ी निजी कंपनी Edutest Solutions Pvt Ltd के कार्यालयों और अन्य परिसरों की भी जांच की गई। जांच का दायरा बेंगलुरु के अलावा हासन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुर्गी और बेलगावी तक पहुंचा। गुजरात के अहमदाबाद में भी ED की टीमों ने तलाशी ली।
70 से 80 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
ED की कार्रवाई बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज चार FIR के आधार पर शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी है। शिकायतकर्ताओं और कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि पशु चिकित्सा अधिकारी के पद पर अंतिम चयन सुनिश्चित कराने के लिए कथित बिचौलियों ने प्रति उम्मीदवार 70 से 80 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी। जांच एजेंसियों को रिश्वत की कथित मांग से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के दौरान की जा रही है।
पेपर लीक से लेकर OMR में हेरफेर तक के आरोप
जांच में भर्ती प्रक्रिया में कई स्तरों पर कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, OMR शीट में हेरफेर और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से छेड़छाड़ जैसे आरोप शामिल हैं। एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि क्या KPSC से जुड़े अधिकारियों के रिश्तेदारों या पसंदीदा उम्मीदवारों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
करोड़ों के लेन-देन और संपत्तियों की जांच
ED का मुख्य फोकस कथित रिश्वत से हासिल रकम और उसके इस्तेमाल पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर जुटाई गई रकम को कहां रखा गया, किन खातों के जरिए उसका लेन-देन हुआ और क्या उसे संपत्तियों या अन्य निवेशों में लगाया गया। तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण, हार्ड ड्राइव, वित्तीय दस्तावेज और कथित बिचौलियों तथा उम्मीदवारों के बीच हुए लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है। छापेमारी या जांच में सामने आए आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है, और संबंधित अधिकारियों, उम्मीदवारों या निजी कंपनी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।