नई दिल्ली. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने शनिवार को कहा कि तेजस लड़ाकू विमानों को वायुसेना में शामिल करने में हो रही देरी भारतीय वायुसेना के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की संख्या लगातार घट रही है और वह भी ऐसे वक्त में जब सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वायु शक्ति की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है। वायुसेना दिवस से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने यह भी कहा कि अगले कुछ साल तक इंडियन एयरफोर्स को हर साल करीब 36-40 लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की जरूरत है। उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान को चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिलने की खबरें आई हैं।
तेजस आपूर्ति में देरी पर चिंता
वायुसेना प्रमुख ने अपनी वायुसेना को तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर भी चिंता जताई। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल द्वारा इन विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इससे हमें नुकसान होगा। स्वदेशी विमानों की समय पर उपलब्धता न होने से वायुसेना की तैयारियों पर असर पड़ रहा है। स्क्वाड्रन की संख्या घटने से परिचालन क्षमता प्रभावित हो सकती है। सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ते माहौल में यह देरी चिंता का विषय है। एयर चीफ मार्शल ने समयबद्ध आपूर्ति की जरूरत पर जोर दिया।
एमआरसीए और राफेल से उम्मीद
एयर चीफ मार्शल ने उम्मीद जताई है कि स्वदेशी रूप से निर्मित तेजस मार्क-1ए विमानों के साथ-साथ बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान यानी एमआरसीए प्रोग्राम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू विमानों को शामिल किए जाने से स्थिति में सुधार होगा। इंडियन एयरफोर्स की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रस्ताव को मूल रूप से करीब दो दशक पहले मंजूरी दी गई थी। प्रोजेक्ट से संबंधित कीमतों पर बातचीत और अन्य अहम मुद्दों पर फिलहाल चर्चा जारी है। इन विमानों के शामिल होने से बेड़े की ताकत बढ़ने की उम्मीद है। स्वदेशी और आयातित दोनों विकल्पों पर काम चल रहा है।
पाकिस्तान-चीन सौदे के बीच चेतावनी
ए.पी. सिंह का बयान पाकिस्तान को चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मिलने की खबरों के बीच आया है। क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को देखते हुए भारतीय वायुसेना को अपनी क्षमता बनाए रखने की जरूरत है। घटते स्क्वाड्रन और देरी से होने वाली आपूर्ति चिंता का विषय बन गई है। हर साल 36 से 40 विमान शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि कमी को पूरा किया जा सके। वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि वायु शक्ति की अहमियत बढ़ रही है इसलिए समय पर विमान मिलना जरूरी है। सुरक्षा तैयारियों को मजबूत रखने पर जोर दिया गया।
आगे की रणनीति और चुनौतियां
वायुसेना प्रमुख के बयान से स्वदेशी उत्पादन और खरीद प्रक्रिया दोनों में तेजी लाने की जरूरत रेखांकित हुई है। एचएएल को तेजस की आपूर्ति समय पर सुनिश्चित करनी होगी। एमआरसीए प्रोग्राम पर चर्चा जारी है और जल्द फैसला अपेक्षित है। क्षेत्रीय चुनौतियों को देखते हुए वायुसेना की युद्धक क्षमता बनाए रखना प्राथमिकता है। एयर चीफ मार्शल के अनुसार देरी से नुकसान होगा इसलिए सभी संबंधित एजेंसियों को सक्रिय रहना होगा। भारतीय वायुसेना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना रही है।