नई दिल्ली. भारत सरकार ने देशभर के सौ से अधिक कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को एक अक्टूबर से लेकर वर्ष के अंत तक अधिकतम क्षमता पर बिजली उत्पादन करने का आदेश दिया है। यह निर्देश इसलिए जारी किया गया है क्योंकि आने वाले महीनों में बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। बिजली मंत्रालय द्वारा पच्चीस सितंबर को जारी इस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सभी संबंधित संयंत्रों को अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा। आदेश में उन संयंत्रों को शामिल किया गया है जिनकी स्थापित क्षमता कम से कम पचास मेगावाट है। सरकार का मानना है कि इस कदम से औद्योगिक क्षेत्रों सहित समग्र बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
आपातकालीन प्रावधानों के तहत लिया गया फैसला
यह आदेश विद्युत अधिनियम के आपातकालीन प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया गया है। सामान्य परिस्थितियों में कैप्टिव संयंत्र अपनी जरूरत के अनुसार ही बिजली बनाते हैं लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने इन्हें बाध्य किया है कि वे अधिकतम उत्पादन करें। बिजली मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन संयंत्रों को हर सप्ताह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। रिपोर्ट में उत्पादन की मात्रा, कैप्टिव खपत और बिक्री के आंकड़े शामिल करने होंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की नियमित निगरानी से आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने में आसानी होगी।
कम कोयला स्टॉक वाली इकाइयों पर दबाव
देश में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में से लगभग चालीस प्रतिशत इकाइयां फिलहाल गंभीर रूप से कम कोयला स्टॉक के साथ चल रही हैं। अल नीनो प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक बढ़ने से बिजली की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है। इस स्थिति ने कोयले की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। कैप्टिव संयंत्रों को अधिकतम उत्पादन का आदेश देने के बावजूद कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सरकार कोयले के आवंटन और परिवहन व्यवस्था को तेज करने के प्रयास कर रही है ताकि इन संयंत्रों का संचालन सुचारू रूप से जारी रह सके।
औद्योगिक इकाइयों को प्रभावित करने वाला निर्देश
ये कैप्टिव कोयला संयंत्र मुख्य रूप से औद्योगिक इकाइयों को बिजली उपलब्ध कराते हैं। इनमें एल्युमीनियम स्मेल्टर, इस्पात संयंत्र, सीमेंट कारखाने और तेल रिफाइनरियां शामिल हैं। इन उद्योगों की बिजली जरूरत लगातार बनी रहती है और किसी भी तरह की कमी उत्पादन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। सरकार का मानना है कि इन संयंत्रों को अधिकतम क्षमता पर चलाकर न सिर्फ उद्योगों की मांग पूरी की जा सकेगी बल्कि ग्रिड पर दबाव भी कम होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
अधिशेष बिजली बेचने के निर्देश
बिजली मंत्रालय ने कैप्टिव संयंत्रों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपनी जरूरत से अधिक पैदा होने वाली बिजली को बिजली एक्सचेंज के माध्यम से बेचें। इससे खुले बाजार में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। संयंत्र संचालकों को अधिशेष बिजली की बिक्री के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तुरंत करने को कहा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बिजली बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आएगी जिससे कीमतों पर भी नियंत्रण रखने में सहायता मिलेगी। सरकार चाहती है कि कैप्टिव संयंत्र सिर्फ अपनी खपत तक सीमित न रहें बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड को भी मजबूती प्रदान करें।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को साप्ताहिक रिपोर्ट अनिवार्य
आदेश के अनुसार सभी संबंधित संयंत्रों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को हर सप्ताह विस्तृत जानकारी देनी होगी। रिपोर्ट में दैनिक और साप्ताहिक उत्पादन के आंकड़े, कैप्टिव खपत का विवरण तथा खुले बाजार में बेची गई बिजली की मात्रा शामिल करनी होगी। इस व्यवस्था से सरकार को वास्तविक समय में स्थिति की निगरानी करने में सुविधा होगी। यदि कोई संयंत्र अधिकतम क्षमता पर उत्पादन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की संभावना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी व्यवस्था है और मांग सामान्य होने पर इसमें बदलाव किया जा सकता है।