वैश्विक रक्षा और सुरक्षा मामलों पर शोध करने वाली संस्था Stockholm International Peace Research Institute की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में भारत का रक्षा व्यय 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य व्यय करने वाला देश बन गया है। यह आंकड़ा केवल रक्षा खर्च में वृद्धि का संकेत नहीं है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति और सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रमों की गंभीरता को भी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच भारत अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा है।
आधुनिक हथियारों और लंबी दूरी की क्षमताओं पर बढ़ा फोकस
रिपोर्ट के अनुसार भारत अब केवल पारंपरिक सैन्य ताकत पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों और उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। विशेष रूप से ऐसी मिसाइल प्रणालियों और रणनीतिक हथियारों के निर्माण पर काम किया जा रहा है, जो व्यापक दूरी तक प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम हों। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह दृष्टिकोण भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सैन्य आधुनिकीकरण के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन, उन्नत निगरानी प्रणालियां और तकनीक आधारित युद्धक क्षमताओं को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।
परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भी भारत की स्थिति मजबूत
सिपरी रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित रूप से लगभग 190 परमाणु हथियार मौजूद थे। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में सीमित लेकिन महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम के अंतर्गत नई प्रणालियों के विकास और रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत की परमाणु नीति का मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करना माना जाता है। बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण में यह क्षमता भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करती है।
पाकिस्तान भी बढ़ा रहा है सैन्य और परमाणु तैयारी
रिपोर्ट में पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं का भी उल्लेख किया गया है। अनुमान के अनुसार जनवरी 2026 तक पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार मौजूद थे। सिपरी का मानना है कि पाकिस्तान नई सैन्य तकनीकों के विकास और विखंडनीय सामग्री के भंडारण पर लगातार काम कर रहा है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार में और वृद्धि संभव है। यही कारण है कि दक्षिण एशिया का सामरिक संतुलन वैश्विक रणनीतिक विश्लेषकों के लिए लगातार अध्ययन और चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत-पाक सैन्य तनाव का भी हुआ उल्लेख
रिपोर्ट में मई 2025 के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमित लेकिन गंभीर सैन्य टकराव का भी जिक्र किया गया है। सिपरी के अनुसार उस अवधि में दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था और सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास किया और व्यापक संघर्ष की संभावना को टालने में सफलता प्राप्त की। विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है।
अमेरिका, चीन और रूस अब भी रक्षा खर्च में शीर्ष पर
सिपरी रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर रक्षा व्यय में वृद्धि का सिलसिला लगातार जारी है। वर्ष 2025 में US दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य व्ययकर्ता बना रहा, जबकि चीन दूसरे और रूस तीसरे स्थान पर रहे। इन देशों के बाद अन्य प्रमुख शक्तियां भी अपने रक्षा बजट में लगातार वृद्धि कर रही हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और नई सैन्य तकनीकों की होड़ ने रक्षा खर्च को नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है। ऐसे माहौल में भारत का शीर्ष पांच सैन्य व्ययकर्ताओं में शामिल होना उसकी बढ़ती वैश्विक रणनीतिक भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।