ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया। इसी अनुभव से सबक लेते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश की प्रमुख तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी ने कर्नाटक के मंगलूरु में 1.75 मिलियन टन, यानी लगभग 1.3 करोड़ बैरल क्षमता वाला नया रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट या आपूर्ति बाधा की स्थिति में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित बनाए रखना है।
मंगलूरु में बनेगा नया रणनीतिक तेल भंडार
ओएनजीसी की योजना के तहत बनने वाला नया रणनीतिक तेल भंडार भारत की ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करेगा। कंपनी ने संकेत दिया है कि इस परियोजना को राष्ट्रीय हित के अनुरूप विकसित किया जाएगा और इसके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति भी केंद्र सरकार से मांगी जाएगी। रणनीतिक भंडार का महत्व केवल आपातकालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे तेल बाजार में अस्थिरता के दौरान भी देश को बेहतर प्रबंधन का विकल्प मिलेगा।
ओडिशा और पादुर में भी विस्तार की तैयारी
भारत सरकार भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक भंडारण क्षमता का व्यापक विस्तार करने की योजना पर भी काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत ओडिशा के चांदीखोल में लगभग 4 मिलियन टन तथा कर्नाटक के पादुर में 2.5 मिलियन टन क्षमता वाले नए रणनीतिक तेल भंडार विकसित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की कुल रणनीतिक भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे आयात पर निर्भरता के बावजूद आपूर्ति जोखिम कम किया जा सकेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है भारत के लिए अहम
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। वैश्विक स्तर पर परिवहन होने वाले लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान युद्ध के दौरान इस समुद्री मार्ग में आई बाधाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर डाला था। ऐसे में भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक संकट का प्रभाव कम करने के लिए रणनीतिक भंडारण क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार केवल आपातकालीन ईंधन भंडारण का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इससे वैश्विक बाजार में अचानक कीमतें बढ़ने, युद्ध, समुद्री मार्ग अवरुद्ध होने या आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियों में देश के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध रहेगा। सरकार की यह रणनीति ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ-साथ उद्योग, परिवहन और आम उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा करेगी।