भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार उत्तर भारत और पूर्वी भारत के ऊपर सक्रिय मौसमी प्रणालियां मौसम को अस्थिर बना रही हैं। उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण तथा पूर्वी बिहार से गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल तक फैला कम दबाव का क्षेत्र व्यापक वर्षा गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। इन प्रणालियों के प्रभाव से देश के बड़े हिस्से में गरज-चमक, तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है और स्थानीय स्तर पर गंभीर परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं।
17 राज्यों में जारी हुआ हाई अलर्ट, किसानों को विशेष सतर्कता की सलाह
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। इन राज्यों में तेज आंधी के साथ भारी वर्षा और वज्रपात की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण फसलों को नुकसान, बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेड़ों के गिरने जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। किसानों को खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा तथा कृषि उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश में बारिश और तूफान का दोहरा असर, कई जिलों पर नजर
उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मौसम काफी सक्रिय रहने की संभावना है। पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और आजमगढ़ सहित कई जिलों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों, कमजोर संरचनाओं और बड़े पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। राजधानी लखनऊ में भी तापमान में मामूली गिरावट के बावजूद उमस और अस्थिर मौसम बना रह सकता है।
मध्य प्रदेश में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक का दौर, कई जिले प्रभावित
मध्य प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने वाला है। विदिशा, कटनी, इंदौर, नर्मदापुरम, भोपाल, मुरैना, उज्जैन, अशोकनगर, नीमच, राजगढ़ और सीहोर सहित अनेक जिलों में बारिश और तेज आंधी की संभावना जताई गई है। कई स्थानों पर हवा की गति 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में स्थानीय स्तर पर तेज गर्जना और वज्रपात की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में भी बढ़ा खतरा
हिमालयी राज्यों में मौसम और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने का जोखिम बढ़ गया है। वहीं पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और आसपास के राज्यों में भारी वर्षा और वज्रपात की आशंका बनी हुई है। लगातार वर्षा से निचले इलाकों में जलभराव और छोटी नदियों के जलस्तर में वृद्धि हो सकती है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
अगले कुछ दिन रहेंगे चुनौतीपूर्ण, सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक देश के विभिन्न हिस्सों में आंधी, बारिश और वज्रपात की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान बिजली के खंभों, खुले मैदानों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। किसानों, यात्रियों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बदलते मौसम के बीच समय-समय पर जारी होने वाले आधिकारिक मौसम बुलेटिनों का पालन करना ही सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।