कोलकाता डेस्क: महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और मानवतावादी विचारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 207वीं जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं ने उनके सामाजिक और शैक्षिक योगदान को याद करते हुए नमन किया।
नितिन गडकरी ने बताया बंगाल पुनर्जागरण का प्रमुख स्तंभ
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ईश्वर चंद्र विद्यासागर को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने विद्यासागर को बंगाल पुनर्जागरण के प्रमुख स्तंभों में से एक और महान समाज सुधारक बताया।
योगी आदित्यनाथ ने नारी शिक्षा के योगदान को किया याद
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर को भारतीय नवजागरण का अग्रदूत बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नारी शिक्षा, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण के क्षेत्र में विद्यासागर का योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
नायब सिंह सैनी ने शिक्षा और सामाजिक समानता का किया उल्लेख
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विद्यासागर के शिक्षा और सामाजिक सुधार से जुड़े कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम माना और नारी शिक्षा, सामाजिक समानता तथा जनजागरण के लिए लगातार काम किया। इसके साथ ही बांग्ला भाषा और साहित्य को सरल एवं आधुनिक रूप देने में उनके योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
रेखा गुप्ता और भजनलाल शर्मा ने भी दी श्रद्धांजलि
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर को बंगाल की नवजागरण चेतना का महत्वपूर्ण प्रकाश-स्तंभ बताया और उनकी जयंती पर नमन किया। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नारी शिक्षा, सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों के लिए उनके संघर्ष को याद किया।
बिहार और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी किया स्मरण
बिहार के मुख्यमंत्री ने विद्यासागर को महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक और मानवतावादी बताते हुए उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनके नारी सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार से जुड़े योगदान को याद किया।
महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के प्रबल समर्थक थे विद्यासागर
ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर 1820 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के बीरसिंह गांव में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए समर्पित किया। महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्होंने हिंदू विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके बाद 1856 में हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ। उन्होंने बाल विवाह और बहुविवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई।
शिक्षा और बांग्ला भाषा के विकास में भी रहा अहम योगदान
विद्यासागर ने शिक्षा के आधुनिकीकरण और बांग्ला गद्य को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘वर्ण परिचय’ बांग्ला भाषा सीखने वाले बच्चों के लिए लंबे समय तक एक महत्वपूर्ण प्राथमिक ग्रंथ रही। शिक्षा के साथ सामाजिक सुधार को जोड़ने वाली उनकी सोच ने उन्हें भारतीय नवजागरण के प्रमुख व्यक्तित्वों में शामिल किया।