कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने संसद के मानसून सत्र की औपचारिक समाप्ति में हो रही देरी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। रमेश का दावा है कि सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और सत्र के औपचारिक समापन के बीच अब 29 दिनों का अंतर हो चुका है। कांग्रेस नेता ने इसे सरकार का नया रिकॉर्ड बताते हुए कहा कि यह अंतर 2015 के 28 दिनों के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने में इतनी देरी क्यों कर रही है।
2015 का रिकॉर्ड भी पीछे छूटा, जयराम रमेश ने उठाया सवाल
जयराम रमेश के मुताबिक, आम तौर पर संसद के किसी सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और उसके औपचारिक समापन के बीच सिर्फ तीन से चार दिन का अंतर रहता है। लेकिन 2026 के मानसून सत्र में यह अवधि बढ़कर 29 दिन हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि मानसून सत्र को औपचारिक तौर पर कब समाप्त किया जाएगा।
अमित शाह पर भी लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप
जयराम रमेश ने इस पूरे मामले को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एक प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक से जोड़ते हुए सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता का आरोप है कि सरकार लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है। रमेश ने दावा किया कि इसके लिए उन राजनीतिक दलों का रुख बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्होंने पहले इस प्रस्ताव का विरोध किया था। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं और सरकार की ओर से इन दावों पर प्रतिक्रिया का उल्लेख इस रिपोर्ट में नहीं है।
‘सरकार के पास जरूरी संख्या नहीं’, रमेश का दावा
रमेश ने दावा किया कि सरकार के पास प्रस्तावित कदम के लिए आवश्यक संख्या बल मौजूद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 अप्रैल 2026 को विधेयक के खिलाफ मतदान करने वाली तीन पार्टियों में पहले ही विभाजन कराया जा चुका है और अब अन्य विरोधी दलों पर भी दबाव बनाने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस सांसद ने सरकार पर धमकी, दबाव और राजनीतिक प्रलोभन के जरिए समर्थन जुटाने का आरोप लगाया। उन्होंने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि खुद को ‘चाणक्य’ बताने वाली राजनीति के बावजूद सरकार कथित तौर पर संख्या बल की वास्तविक स्थिति को स्वीकार नहीं कर रही है।
संसद को ‘मनोवैज्ञानिक रणनीति’ के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप
जयराम रमेश ने संसद के मानसून सत्र को खुला रखने को विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति बताया। उनका कहना है कि सरकार जब चाहे संसद का सत्र बुला सकती है, लेकिन अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद औपचारिक समापन में इतनी लंबी देरी अपने आप में सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस देरी का इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
परिसीमन को लेकर भी केंद्र पर सवाल
जयराम रमेश ने परिसीमन के मुद्दे को लेकर भी केंद्र सरकार से सवाल किए। उन्होंने पूछा कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए अब तक सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई गई। रमेश के अनुसार, विपक्षी दल मार्च 2026 के मध्य से लगातार ऐसी बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर कथित गोपनीयता पर भी सवाल उठाया । कांग्रेस सांसद ने कहा कि परिसीमन का मुद्दा केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारतीय गणराज्य की संरचना और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था से है।
29 दिन की देरी ने बढ़ाई राजनीतिक बहस
मानसून सत्र के औपचारिक समापन में देरी को लेकर जयराम रमेश के आरोपों ने संसद और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। कांग्रेस इसे सरकार की रणनीति से जोड़ रही है, जबकि इस पूरे मामले में आगे सरकार की ओर से क्या स्पष्टीकरण आता है, इस पर नजर रहेगी।