जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों की सतर्कता ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया। क्रालगुंड थाना क्षेत्र के गणपोरा स्थित एक बाग में नियमित तलाशी अभियान के दौरान सेना की 32 राष्ट्रीय राइफल्स इकाई को प्रेशर कुकर में छिपा संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुरक्षा बलों को क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद खोज अभियान चलाया गया था। तलाशी के दौरान विस्फोटक जैसी संदिग्ध वस्तु मिलने पर पूरे क्षेत्र को तत्काल सुरक्षा घेरे में ले लिया गया ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
सेना और विशेष अभियान दल ने संभाला मोर्चा
संदिग्ध आईईडी मिलने के तुरंत बाद सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान दल ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी करते हुए आम लोगों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी ताकि निष्क्रियकरण की प्रक्रिया सुरक्षित ढंग से पूरी की जा सके। बम निष्क्रिय करने वाली विशेषज्ञ टीम को तत्काल घटनास्थल पर बुलाया गया, जिसने विस्फोटक की प्रकृति और उसकी क्षमता का परीक्षण प्रारंभ किया। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अत्यधिक सावधानी बरती जाती है क्योंकि किसी भी प्रकार की लापरवाही जनहानि का कारण बन सकती है।
प्रेशर कुकर में आईईडी छिपाने की रणनीति क्यों होती है खतरनाक
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार प्रेशर कुकर का उपयोग कर तैयार किए गए आईईडी को अत्यंत घातक माना जाता है। धातु के मजबूत ढांचे के कारण विस्फोट होने पर इसकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और विस्फोट के दौरान निकलने वाले धातु के टुकड़े आसपास मौजूद लोगों तथा सुरक्षा बलों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। यही कारण है कि ऐसे संदिग्ध उपकरण मिलने पर उन्हें हाथ लगाने के बजाय विशेषज्ञ बम निरोधक दस्ते की सहायता से नियंत्रित परिस्थितियों में निष्क्रिय किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादी संगठन सामान्य घरेलू वस्तुओं का उपयोग कर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश करते रहे हैं, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां ऐसी वस्तुओं की भी गहन जांच करती हैं।
पूरे इलाके में चलाया जा रहा व्यापक तलाशी अभियान
सुरक्षा एजेंसियों ने केवल संदिग्ध आईईडी बरामद करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है, बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया है। बागों, खेतों, जंगलों और आसपास के मार्गों की गहन जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं अन्य विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध उपकरण तो नहीं छिपाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह विस्फोटक किस उद्देश्य से वहां रखा गया था और इसके पीछे किसी संगठित आतंकी मॉड्यूल या घुसपैठ नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है। खुफिया एजेंसियों द्वारा स्थानीय स्तर पर भी आवश्यक सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं।
आतंकवाद के विरुद्ध लगातार जारी है सुरक्षा बलों का अभियान
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल लगातार आतंकवाद और घुसपैठ की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए संयुक्त अभियान चला रहे हैं। सीमा पार से आतंकवादी संगठनों द्वारा घुसपैठ और विस्फोटक सामग्री पहुंचाने के प्रयासों को विफल करने के लिए सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां समन्वित रणनीति के तहत कार्य कर रही हैं। हाल के वर्षों में खुफिया सूचनाओं के आधार पर अनेक संभावित आतंकी साजिशों को समय रहते नाकाम किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय नागरिकों का सहयोग, आधुनिक निगरानी तकनीक और सुरक्षा बलों की निरंतर सतर्कता ही ऐसे खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने का सबसे मजबूत आधार है। वर्तमान मामले में भी सुरक्षा एजेंसियां प्रत्येक पहलू की गहन जांच कर रही हैं ताकि इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों का पता लगाया जा सके और भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।