राष्ट्रीय राइफल्स की 50वीं बटालियन, कुमाऊं रेजिमेंट के मेजर भार्गव कलिता को आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके असाधारण साहस, अनुकरणीय नेतृत्व और उत्कृष्ट परिचालन उपलब्धियों के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। शौर्य चक्र भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कारों में से एक है।
कई सफल अभियानों का किया नेतृत्व
अक्टूबर 2022 से मेजर कलिता ने कई महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में तीन कुख्यात आतंकवादियों को मार गिराया गया, जबकि चार कट्टर ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को गिरफ्तार किया गया। उनके प्रयासों ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
खुफिया सूचना पर रचा गया सटीक ऑपरेशन
2 दिसंबर 2024 को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर मेजर कलिता ने एक खतरनाक आतंकवादी के खिलाफ सुनियोजित घात लगाकर अभियान चलाया। उन्होंने अपनी टीम को रणनीतिक रूप से तैनात किया और आतंकवादी के लक्ष्य क्षेत्र में पहुंचने का धैर्यपूर्वक इंतजार किया।
मुठभेड़ में दिखाया अदम्य साहस
ऑपरेशन के दौरान चुनौती मिलने पर आतंकवादी ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और भागने की कोशिश की। मेजर कलिता ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए अपनी टीम को इस तरह तैनात किया कि आतंकवादी के सभी संभावित भागने के रास्ते बंद हो गए। लगातार निगरानी और सटीक जवाबी फायरिंग से आतंकवादी को घेर लिया गया।
जान की परवाह किए बिना किया सामना
गंभीर खतरे के बावजूद मेजर कलिता ने अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकवादी की ओर बढ़कर निर्णायक कार्रवाई की। बेहद नजदीकी मुठभेड़ में उन्होंने आतंकवादी को मार गिराया। बाद में उसकी पहचान ए++ श्रेणी के आतंकवादी के रूप में हुई, जो सात निर्दोष नागरिकों की हत्या और सुरक्षा बलों पर कई घातक हमलों में शामिल था।
भारतीय सेना की परंपराओं को किया गौरवान्वित
मेजर भार्गव कलिता ने साहस, नेतृत्व, रणनीतिक कौशल और कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनके निडर नेतृत्व और वीरता को देखते हुए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उनका यह सम्मान देश की सुरक्षा के लिए समर्पित सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है।