नई दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ADC रह चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने महज 30 साल की उम्र में सेना से समय से पहले सेवानिवृत्ति का फैसला लिया। उनके इस कदम के बाद इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अब उन्होंने एक पॉडकास्ट में अपने फैसले के पीछे की वास्तविक वजह के बारे में विस्तार से बात की है।
मेजर ऋषभ के मुताबिक, सेना छोड़ना उनके लिए कोई आसान या अचानक लिया गया फैसला नहीं था। उन्होंने अपने सैन्य जीवन को केवल नौकरी या करियर के रूप में नहीं देखा था, बल्कि वर्दी पहनना उनके जीवन का सपना था। एक दशक से अधिक समय तक इस सपने को जीने के बाद सेना से अलग होने का निर्णय उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रहा।
सेना छोड़ना कभी योजना में नहीं था
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया कि उन्होंने कभी सेना छोड़ने के बारे में नहीं सोचा था। सैन्य जीवन उनके लिए बचपन से देखे गए सपने को पूरा करने जैसा था और उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा इसी लक्ष्य को हासिल करने में लगाया। ऐसे में समय से पहले सैन्य करियर समाप्त करने का फैसला उनके लिए किसी सामान्य करियर बदलाव जैसा नहीं था।
उन्होंने संकेत दिया कि सेना में आगे बढ़ने और देश की सेवा करने की उनकी इच्छा कायम थी। लेकिन एक समय ऐसा आया, जब उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन की प्राथमिकताओं और सैन्य जिम्मेदारियों के बीच कठिन फैसला लेना पड़ा। आखिरकार उन्होंने परिवार को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।
माता-पिता की जिम्मेदारी बनी सबसे बड़ी वजह
मेजर ऋषभ के अनुसार, इस्तीफा देने से पहले वह खुद को ऐसे मोड़ पर पा रहे थे, जहां उन्हें अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों में से किसी एक को प्राथमिकता देनी थी। उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं के बजाय परिवार के साथ रहने का फैसला किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी सैन्य व्यवस्था या नौकरी से असंतुष्टि के कारण नहीं लिया गया। उनके लिए यह एक ऐसा त्याग था, जिसे परिवार के साथ बातचीत और काफी विचार-विमर्श के बाद स्वीकार किया गया। समय से पहले सैन्य करियर समाप्त होने का दुख होने के बावजूद उन्हें देश की सेवा में बिताए अपने हर पल पर गर्व है।
राष्ट्रपति के ADC की जिंदगी में सख्त प्रोटोकॉल
राष्ट्रपति के ADC की जिम्मेदारी बेहद प्रतिष्ठित मानी जाती है और इस भूमिका में अधिकारी को राष्ट्रपति के कार्यक्रमों तथा आधिकारिक गतिविधियों से जुड़े कड़े प्रोटोकॉल का पालन करना होता है। मेजर ऋषभ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस जिम्मेदारी के दौरान निजी जीवन काफी सीमित हो जाता है।
उनके अनुसार, ADC के रूप में कार्यकाल के दौरान व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई मामलों में अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है। इसी संदर्भ में उन्होंने शादी से जुड़े नियम का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान ADC को शादी करने की अनुमति नहीं थी।
शादी को लेकर चल रही अटकलों पर भी दिया जवाब
मेजर ऋषभ के समय से पहले सेना छोड़ने के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि उन्होंने शादी की योजना के कारण यह फैसला लिया। उन्होंने इन चर्चाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने शादी नहीं की है और फिलहाल शादी करने की उनकी कोई योजना भी नहीं है।
इस बयान के साथ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सैन्य करियर छोड़ने का फैसला निजी वैवाहिक योजना से जुड़ा हुआ नहीं था। उनके अनुसार, इसके पीछे मुख्य कारण पारिवारिक जिम्मेदारियां थीं, जिन्हें उन्होंने अपने सैन्य करियर और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर रखा।
देशसेवा पर आज भी गर्व
मेजर ऋषभ ने सेना से अलग होने के बावजूद अपने सैन्य जीवन को लेकर किसी तरह की निराशा व्यक्त नहीं की। उन्होंने कहा कि वर्दी पहनना उनके लिए जीवन का सपना था और उस सपने को पूरा करने का अवसर उनके लिए गौरव की बात रहा। राष्ट्रपति के ADC के रूप में मिली जिम्मेदारी उनके सैन्य जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय रही।
समय से पहले करियर समाप्त करने का फैसला भले ही कठिन रहा हो, लेकिन उन्होंने इसे परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए जरूरी कदम बताया। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि बेहद प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण सैन्य जिम्मेदारियों के पीछे अधिकारियों को अपने निजी जीवन में भी कई कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।