नई दिल्ली. देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए आने वाले समय में टोल भुगतान का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए Multi-Lane Free Flow यानी MLFF व्यवस्था शुरू करने की तैयारी चल रही है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में गडकरी ने बताया कि फास्टैग लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों के इंतजार का समय काफी कम हुआ है। पहले कई स्थानों पर वाहन चालकों को करीब 12 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था और कुछ मामलों में यह समय 30 मिनट तक पहुंच जाता था। फास्टैग के बाद यह प्रतीक्षा अवधि करीब 80 से 90% तक कम हुई है।
फरवरी तक शुरू हो सकती है MLFF व्यवस्था
सरकार अब टोल प्लाजा पर बचने वाले इस इंतजार को भी समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। गडकरी के अनुसार, MLFF व्यवस्था को फरवरी तक शुरू किए जाने की उम्मीद है। इसके लागू होने के बाद वाहनों को टोल बूथ पर रुककर भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी और राजमार्ग पर यातायात लगातार आगे बढ़ सकेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल वाहन चालकों का समय बचाना नहीं है, बल्कि टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम और वाहनों की कतार को भी कम करना है। यदि यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर लागू होती है तो लंबी दूरी के सफर में वाहन चालकों को बार-बार रुकने से मिलने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।
क्या है Multi-Lane Free Flow सिस्टम?
MLFF एक ऐसी टोल व्यवस्था है, जिसमें वाहनों को रोकने के लिए पारंपरिक बैरियर या टोल बूथ की आवश्यकता नहीं होती। वाहन निर्धारित टोल क्षेत्र से बिना रुके गुजरते हैं और तकनीकी प्रणाली के माध्यम से उनकी पहचान तथा टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
इस व्यवस्था में सड़क पर वाहनों की आवाजाही को बाधित किए बिना टोल वसूली की जा सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राजमार्गों पर यातायात का प्रवाह बेहतर होगा और टोल प्लाजा के संचालन तथा रखरखाव से जुड़ी लागत में भी कमी आ सकती है।
फास्टैग ने बचाए 71 करोड़ घंटे
नितिन गडकरी ने फास्टैग के प्रभाव को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार, फास्टैग के कारण हर साल करीब 71 करोड़ घंटे की बचत हो रही है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग 68,500 करोड़ रुपये का लाभ होने का अनुमान है।
फास्टैग ने टोल भुगतान की प्रक्रिया को तेज करने के साथ वाहनों की कतार कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब सरकार इसी आधारभूत व्यवस्था को आगे बढ़ाकर ऐसी प्रणाली विकसित करना चाहती है, जिसमें टोल भुगतान के लिए वाहन को लगभग बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया जा सके।
ईंधन और प्रदूषण में भी कमी की उम्मीद
टोल प्लाजा पर वाहनों के बार-बार रुकने और फिर गति पकड़ने से ईंधन की अतिरिक्त खपत होती है। इसके अलावा लंबे समय तक इंजन चालू रहने और वाहनों के एक जगह जमा होने से वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। MLFF के जरिये वाहनों की निरंतर आवाजाही बनाए रखने से इन दोनों समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
गडकरी ने फास्टैग व्यवस्था के पर्यावरणीय लाभ का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे होने वाला फायदा करीब 2.7 करोड़ पेड़ लगाने से होने वाले लाभ के बराबर है। सरकार का मानना है कि टोल भुगतान को अधिक तेज और निर्बाध बनाने से आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण को भी फायदा पहुंचाया जा सकता है।
हाईवे सफर में आने वाला है बड़ा बदलाव
फास्टैग ने जहां टोल भुगतान को पहले की तुलना में तेज किया, वहीं MLFF व्यवस्था टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत को ही खत्म करने की दिशा में अगला कदम है। इसके सफल क्रियान्वयन से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात का प्रवाह अधिक सहज हो सकता है और लंबी दूरी की यात्रा में लगने वाला अतिरिक्त समय भी कम हो सकता है।
हालांकि, नई व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए तकनीकी ढांचे, डिजिटल भुगतान और वाहन पहचान प्रणाली को मजबूत बनाना महत्वपूर्ण होगा। फरवरी तक MLFF शुरू होने की उम्मीद के साथ अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इसे किस चरण में और किन राजमार्गों पर लागू करती है।