नई दिल्ली। देशभर में भीषण गर्मी के बीच मानसून को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल 26 मई को केरल पहुंच सकता है, जो सामान्य तारीख 1 जून से करीब 6 दिन पहले होगा। मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो मानसून 22 मई तक भी दस्तक दे सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह पिछले 35 साल का रिकॉर्ड टूट सकता है। इससे पहले साल 1990 में मानसून 18 मई को केरल पहुंचा था।
अगले 24 घंटे में मानसून बढ़ने के संकेत
IMD के अनुसार अगले 24 घंटों में दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है। मौसम विभाग ने पश्चिमी तट के दक्षिणी हिस्सों में 28 मई तक भारी बारिश की संभावना जताई है।
जल्दी मानसून का मतलब ज्यादा बारिश नहीं
मौसम विभाग ने साफ किया है कि मानसून का जल्दी पहुंचना अच्छी बारिश की गारंटी नहीं होता। कई बार मानसून जल्दी आने के बावजूद पूरे सीजन में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। 2025 में मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था। IMD के मुताबिक मानसून की कुल बारिश इस बात पर निर्भर करती है कि सीजन के दौरान कितने लो-प्रेशर सिस्टम बनते हैं और मानसून की गतिविधियां कैसी रहती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों ने क्या कहा
स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने कहा कि इस साल प्रशांत महासागर से मिलने वाले संकेत अल नीनो की स्थिति बनने की ओर इशारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मानसून लहरों में आगे बढ़ता है और इसकी तीव्रता कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है।
अल नीनो का असर बढ़ने की आशंका
अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र (NOAA) ने कहा है कि अल नीनो जल्द विकसित हो सकता है और साल के अंत तक यह काफी मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है। NOAA के अनुसार मई से जुलाई के बीच अल नीनो बनने की संभावना 82 प्रतिशत है। सितंबर से नवंबर के बीच इसके मजबूत या बहुत मजबूत होने की संभावना 50 प्रतिशत से ज्यादा बताई गई है।
कहां सामान्य से कम और कहां ज्यादा बारिश
IMD के मुताबिक इस बार देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पूर्व भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग महीने के अंत तक मानसून का दूसरा चरण पूर्वानुमान भी जारी करेगा।
कैसे तय होती है मानसून की एंट्री
IMD ने बताया कि केरल में मानसून के आगमन की तारीख का अनुमान लगाने के लिए 2005 से एक स्वदेशी सांख्यिकीय मॉडल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें समुद्री तापमान, हवा की दिशा और अन्य मौसमीय संकेतों का विश्लेषण किया जाता है।