नई दिल्ली. मानसून का सक्रिय चरण एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक प्रभाव दिखा रहा है। उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी, मध्य और पूर्वोत्तर भारत तक वर्षा की तीव्रता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक अनेक राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, तेज हवाएं और वज्रपात की स्थिति बनी रह सकती है। राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत कुल 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार मिल रही नमी तथा सक्रिय मानसूनी तंत्र के कारण वर्षा की यह स्थिति आगामी दिनों तक बनी रह सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में राहत भी, चुनौती भी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को वर्षा राहत दे सकती है, लेकिन इसके साथ ही जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कुछ क्षेत्रों में तेज बौछारें पड़ सकती हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वर्षा होने पर राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात की गति भी प्रभावित हो सकती है।
गुजरात और राजस्थान में अत्यधिक वर्षा का खतरा
पश्चिम भारत में मानसून का सबसे अधिक प्रभाव गुजरात और राजस्थान पर दिखाई देने की संभावना है। गुजरात के अनेक जिलों में अत्यधिक भारी वर्षा को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। अहमदाबाद, नर्मदा, सूरत, वडोदरा तथा दक्षिण गुजरात के अन्य क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। कुछ स्थानों पर अल्प अवधि में अत्यधिक वर्षा होने से शहरी बाढ़, नदी-नालों के उफान और यातायात अवरुद्ध होने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर राजस्थान के पूर्वी भागों में जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभागों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि यह वर्षा जहां जलाशयों के लिए लाभदायक हो सकती है, वहीं निचले क्षेत्रों में जलभराव और फसलों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य भारत में बढ़ेगी बारिश की रफ्तार
उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रभाव क्षेत्रीय रूप से अलग-अलग दिखाई दे रहा है। पूर्वी जिलों में वर्षा की गतिविधियां पहले से अधिक सक्रिय रहने की संभावना है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में फिलहाल अपेक्षाकृत शुष्क मौसम रह सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दिनों में पूरे प्रदेश में वर्षा की तीव्रता बढ़ेगी। बिहार में भी गरज-चमक, तेज हवाओं और वर्षा का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। राज्य के कई जिलों में पांच अगस्त तक भारी वर्षा हो सकती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी मानसून सक्रिय बना रहेगा, जिससे कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है, हालांकि अत्यधिक वर्षा वाले इलाकों में बाढ़ और जलभराव का जोखिम भी बढ़ सकता है।
महाराष्ट्र, कोंकण और पूर्वोत्तर में मौसम की चुनौती बरकरार
महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और लक्षद्वीप में भी भारी वर्षा का दौर जारी रहने का अनुमान है। विशेष रूप से कोंकण तट और मध्य महाराष्ट्र में तेज बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मिजोरम और सिक्किम के कई हिस्सों में अगले तीन दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। इन क्षेत्रों में पहले से ही भूमि संतृप्त होने के कारण अतिरिक्त वर्षा से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।
असम में बाढ़ ने बढ़ाई चिंता, लाखों लोग प्रभावित
पूर्वोत्तर भारत में सबसे गंभीर स्थिति असम की बनी हुई है, जहां बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। राज्य में दो और लोगों की मृत्यु के बाद बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। तीन लाख से अधिक लोग अब भी इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं। हालांकि कई जिलों में जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक भारी वर्षा की चेतावनी जारी रखी है। इससे राहत कार्यों में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम के बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
मानसून के बीच सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और भारी वर्षा के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। किसानों को खेतों में कार्य करते समय वज्रपात से सावधानी बरतने तथा नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून कृषि और जल संसाधनों के लिए जीवनदायी है, लेकिन इसकी तीव्रता बढ़ने पर आपदा प्रबंधन और समय रहते चेतावनी प्रणाली का प्रभावी होना भी उतना ही आवश्यक है। आने वाले कुछ दिन देश के अनेक हिस्सों के लिए मौसम की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं और प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता संभावित नुकसान को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।