नई दिल्ली. भारत में सामान्य रूप से सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह से मॉनसून की वापसी शुरू हो जाती है लेकिन इस बार स्थिति अलग है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में अभी भी भारी बारिश जारी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मॉनसून की विदाई में देरी के पीछे स्पष्ट मौसमी कारण मौजूद हैं। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में अगले 48 घंटों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। पूर्वांचल और लखनऊ-कानपुर समेत मध्य उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी है। इस देरी के कारण अक्टूबर महीने में भी मॉनसून की सक्रियता बनी रह सकती है।
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का असर
मॉनसून के लौटने में देरी का पहला प्रमुख कारण बंगाल की खाड़ी में लगातार बना हुआ कम दबाव का क्षेत्र है। यहां चक्रवाती हवाओं का प्रभाव सक्रिय है और यह वेदर सिस्टम नमी लेकर मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। इससे मॉनसून वापसी की बजाय अभी भी लगातार बारिश हो रही है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं उत्तर और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही हैं। इस सिस्टम के सक्रिय रहने तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कम दबाव का क्षेत्र मॉनसून की वापसी को और पीछे धकेल सकता है।
ला नीना की सक्रियता से लंबी हो रही अवधि
दूसरा महत्वपूर्ण कारण प्रशांत महासागर में ला नीना की मौसमी परिस्थितियों का सक्रिय होना है। ला नीना अल नीनो के प्रभाव को कमजोर करता है और भारत में मॉनसून की अवधि को लंबा खींच देता है। इस साल सितंबर के अंत तक सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा रही है। ला नीना की सक्रियता के कारण पूरे देश में नमी भरी हवाओं का प्रवाह बना हुआ है। इससे मॉनसून के सामान्य वापसी चक्र में बाधा उत्पन्न हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ला नीना के प्रभाव से अक्टूबर में भी बारिश की संभावना बनी रह सकती है।
दो हवाओं के टकराव से बन रहे घने बादल
तीसरा कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूरब की नम हवाओं और उत्तर-पश्चिम भारत से चलने वाली ठंडी शुष्क पश्चिमी हवाओं का आपस में टकराव है। इस महामिलन से मध्य और पूर्वी भारत में घने बादलों का निर्माण हो रहा है जो भारी बारिश की मुख्य वजह बन रहे हैं। दोनों हवाओं के इस संघर्ष से बादलों का घनत्व बढ़ रहा है और लंबे समय तक बारिश हो रही है। यह टकराव उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में बादलों का घेरा बनाए हुए है। मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अलर्ट
पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, बस्ती, महाराजगंज, प्रयागराज और वाराणसी के साथ मध्य उत्तर प्रदेश में लखनऊ तथा कानपुर में अगले 3 से 4 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद और हापुड़ समेत अन्य इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में भी अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने के साथ हल्की फुहारें पड़ सकती हैं। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 से अधिक जिलों में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
पहाड़ी राज्यों में रेड अलर्ट की चेतावनी
उत्तराखंड में रेड अलर्ट जारी किया गया है और अगले 48 घंटों में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। इन इलाकों में नदियों के जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है। झारखंड और बिहार में भी बादलों का घेरा बना हुआ है जिससे इन राज्यों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है।