नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता में लगातार 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली है। 9 जून 2026 तक मोदी एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4,398 दिनों तक पद पर रह चुके हैं। 10 जून को वह इस मामले में नेहरू को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच देंगे। इस अवसर पर मोदी सरकार की उपलब्धियों, बड़े फैसलों और बीते 12 वर्षों के शासनकाल की चर्चा तेज हो गई है।
नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी, नया इतिहास रचने की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर वह लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटे। अब उन्होंने लगातार चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र में लंबे और स्थिर नेतृत्व का प्रतीक है। पिछले 12 वर्षों में मोदी देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं और घरेलू राजनीति से लेकर वैश्विक मंचों तक भारत की मौजूदगी को मजबूत करने का प्रयास किया है। 10 जून को पीएम मोदी इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे और देश के सबसे लंबे समय तक लगातार चुने हुए प्रधानमंत्री बनने का नया कीर्तिमान अपने नाम कर लेंगे।
डिजिटल इंडिया और UPI ने बदल दी भुगतान व्यवस्था
मोदी सरकार के सबसे चर्चित अभियानों में डिजिटल इंडिया प्रमुख रहा है। सरकार ने डिजिटल तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने और सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन बनाने पर विशेष जोर दिया। इसी दौरान यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ने भारत में भुगतान व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाया। आज देश के छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक डिजिटल भुगतान आम हो चुका है। मोबाइल फोन के जरिए सेकंडों में लेनदेन संभव हुआ है, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है। सरकार का दावा है कि डिजिटल इंडिया अभियान ने ई-गवर्नेंस, वित्तीय समावेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। भारत आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल है।
जनधन योजना से करोड़ों लोगों को मिला बैंकिंग सिस्टम का लाभ
प्रधानमंत्री जनधन योजना मोदी सरकार की शुरुआती और सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल रही है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, जिनके पास पहले बैंक खाता तक नहीं था। जनधन खातों के जरिए करोड़ों लोगों को वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मिली। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था को मजबूत किया गया, जिससे सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने लगा। सरकार का कहना है कि इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका कम हुई तथा गरीब और जरूरतमंद वर्ग को योजनाओं का सीधा लाभ मिलने लगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिली नई गति
मोदी सरकार ने सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर बड़े स्तर पर निवेश किया। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, रेलवे के विद्युतीकरण और आधुनिक ट्रेनों की शुरुआत को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती है। वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों ने भारतीय रेलवे की नई तस्वीर पेश की। वहीं उड़ान योजना के माध्यम से छोटे शहरों को हवाई सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। सरकार का दावा है कि बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिला है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।
अनुच्छेद 370 हटाना बना ऐतिहासिक फैसला
अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण और समान अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बताया। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। केंद्र सरकार का दावा है कि इससे विकास परियोजनाओं को गति मिली और केंद्र की योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा। हालांकि यह फैसला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय भी बना, लेकिन सरकार इसे अपने सबसे बड़े निर्णयों में शामिल करती है।
आयुष्मान भारत, हर घर जल और आवास योजनाओं पर फोकस
स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में मोदी सरकार ने कई बड़े कार्यक्रम शुरू किए। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। जल जीवन मिशन के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से जल पहुंचाने का अभियान चलाया गया। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का दावा किया गया। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं ने ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार लाने और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को मिला बढ़ावा
कोविड महामारी के बाद मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति दी। इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को मजबूत करना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना था। मेक इन इंडिया और पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) जैसी योजनाओं के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन दिया गया। सरकार का दावा है कि इन पहलों के कारण भारत वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में उभर रहा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में बदली रणनीति, बढ़ी आत्मनिर्भरता
पिछले 12 वर्षों में भारत की रक्षा नीति में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसे कदमों को सरकार आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश के रूप में प्रस्तुत करती है। साथ ही स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया गया। आईएनएस विक्रांत, तेजस लड़ाकू विमान और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे प्रोजेक्ट्स भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाले कदम माने जाते हैं। रक्षा निर्यात में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।
स्वच्छ भारत और उज्ज्वला योजना ने बदली ग्रामीण तस्वीर
स्वच्छ भारत मिशन के तहत देशभर में करोड़ों शौचालयों का निर्माण कराया गया। सरकार का कहना है कि इससे स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन का रूप मिला और खुले में शौच की समस्या को कम करने में मदद मिली। वहीं उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। इससे ग्रामीण महिलाओं को धुएं से राहत मिलने और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने का दावा किया गया। इन योजनाओं को सरकार महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत ने बनाई नई पहचान
मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। चंद्रयान-3 मिशन की सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बना दिया। इसके अलावा आदित्य-L1 मिशन और निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने जैसे फैसलों ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई पहचान दी। आज देश में सैकड़ों स्पेस स्टार्टअप सक्रिय हैं और वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में हुई ये उपलब्धियां भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी।