कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भ्रष्टाचार, सिंडिकेट और कथित तोलाबाजी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ी गिरफ्तारी हुई है। न्यू अलीपुर थाना पुलिस ने पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास के भाई और इलाके के प्रभावशाली नेता माने जाने वाले स्वरूप बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने 18 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
देर रात हुई कार्रवाई, इलाके में मचा हड़कंप
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुवार देर रात स्वरूप बिस्वास को गिरफ्तार किया गया। पिछले कुछ समय से टॉलीगंज और न्यू अलीपुर क्षेत्र में कथित सिंडिकेट और अवैध वसूली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। कई निर्माण व्यवसायियों और प्रमोटरों ने आरोप लगाया था कि उन पर दबाव बनाकर पैसे वसूले जाते थे और मांग पूरी नहीं होने पर निर्माण कार्य में बाधाएं खड़ी की जाती थीं।
प्रमोटरों से करोड़ों रुपये मांगने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इलाके में नए अपार्टमेंट और बहुमंजिला परियोजनाओं के लिए कथित तौर पर एक निश्चित रकम देने का दबाव बनाया जाता था। हाल ही में एक निर्माण एजेंसी ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उससे करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगी गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। इसी शिकायत के आधार पर 4 जून 2026 को न्यू अलीपुर थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए यह कार्रवाई की।
कई धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
पुलिस के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं के अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत भी केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि लोगों को डराने और दबाव बनाने के लिए हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था। मामले में एक महिला के साथ छेड़छाड़ का आरोप भी शामिल किया गया है।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
स्वरूप बिस्वास को टॉलीगंज और न्यू अलीपुर क्षेत्र का प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। उनके भाई अरूप बिस्वास लंबे समय तक राज्य सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। ऐसे में इस गिरफ्तारी को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
बीजेपी ने साधा निशाना
घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ दल पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में सिंडिकेट और रंगदारी का नेटवर्क संस्थागत रूप ले चुका था। पार्टी ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, इस मामले पर अभी तक स्वरूप बिस्वास, पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस अब रिमांड के दौरान कथित नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुटी हुई है।