कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक नए और बेहद अजीबोगरीब कानूनी संकट में फंसती नजर आ रही है। विधानसभा में विरोधी दल नेता (Leader of Opposition) को चुनने के लिए जमा किए गए संकल्प पत्र (रेजोल्यूशन) पर विधायकों के हस्ताक्षरों (Signatures) को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में धोखाधड़ी और फर्जी हस्ताक्षर की आशंकाओं के बीच राज्य पुलिस की सीआईडी (CID) टीम ने अचानक कई बड़े टीएमसी नेताओं और विधायकों के घरों पर दस्तक दी है।
इस पूरी कार्रवाई के बीच कैनिंग पूर्व से टीएमसी के कद्दावर विधायक बाहारुल इस्लाम ने एक बेहद विस्फोटक बयान देकर अपनी ही पार्टी की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। बाहारुल ने साफ तौर पर दावा किया है कि विरोधी दल नेता के चयन वाले दस्तावेज पर किया गया हस्ताक्षर उनका है ही नहीं।
"क्या मेरे हस्ताक्षर भूत ने किए?" - विधायक बाहारुल इस्लाम
सीआईडी की टीम जब कैनिंग पूर्व के विधायक बाहारुल इस्लाम के आवास पर जांच के लिए पहुंची, तो उसके बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक ने कहा:"बीती 6 मई को जब विरोधी दल नेता के चयन के लिए रेजोल्यूशन पर साइन कराए जा रहे थे, उस दिन मैं अपने घर से बाहर ही नहीं निकला था। जब मैं वहां मौजूद ही नहीं था, तो उस कागज पर मेरा साइन कहां से आया? क्या मेरा साइन वहां किसी भूत ने कर दिया?"
बाहारुल इस्लाम के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी है और यह साफ कर दिया है कि विधानसभा में जमा किए गए दस्तावेज में कुछ भारी गड़बड़ी हुई है।
हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स के साथ नयना बनर्जी और कुणाल घोष के घर पहुंची CID
इससे पहले गुरुवार (28 मई) दोपहर करीब 3 बजे सीआईडी की 6 सदस्यीय टीम, जिसमें हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स (हस्तलेख विशेषज्ञ) भी शामिल थे, चौरंगी से टीएमसी की वरिष्ठ विधायक नयना बनर्जी के आवास पर पहुंची। सीआईडी ने नयना बनर्जी के हस्ताक्षरों का मिलान करने के लिए उनके पैन कार्ड (PAN Card) और अन्य दस्तावेजों की जांच की। सीआईडी की टीम टीएमसी नेता कुणाल घोष के घर भी पहुंची।
पांच बार की विधायक नयना बनर्जी ने इस पूरी घटनाक्रम को अपने लिए बेहद 'शॉकिंग' और असहज करने वाला बताया है। नयना बनर्जी ने कहा:"साल 2001 में पहली बार विधायक बनने के बाद से लेकर अब तक के मेरे लंबे राजनीतिक करियर में मुझे कभी ऐसी असहज स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा है। 6 मई को ममता बनर्जी के आवास पर बैठक के दौरान एक फॉर्मेट तैयार किया गया था, जिस पर मैंने हस्ताक्षर की जगह ब्लॉक लेटर्स (बड़े अक्षरों) में अपना नाम लिखा था। जांच टीम जो लिखावट देख रही है, वह मेरी ही है।" नयना बनर्जी ने इस पूरे मामले की जानकारी वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को दे दी है।
क्यों फंसा है पेंच और क्यों हो रही है जांच?
दरअसल, विधानसभा के नियमों के मुताबिक किसी भी दल को अपना विरोधी दल नेता (नेता प्रतिपक्ष) घोषित करने के लिए अपने सभी विधायकों के हस्ताक्षर (सहमति) वाला एक आधिकारिक रेजोल्यूशन विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास जमा करना होता है। स्पीकर जब सभी हस्ताक्षरों और प्रक्रिया की जांच कर उसे स्वीकार करते हैं, तभी उस नेता को विधानसभा में 'विरोधी दल नेता' की आधिकारिक मान्यता और मर्यादा मिलती है।
टीएमसी की ओर से इस पद के लिए वरिष्ठ नेता शोभन देव चटर्जी का नाम आगे बढ़ाया गया है। लेकिन टीएमसी द्वारा जमा किए गए इस रेजोल्यूशन में विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर विधानसभा के मुख्य सचिव (प्रिंसिपल सेक्रेटरी) को शक हुआ, जिसके बाद हेयर स्ट्रीट थाने में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीआईडी (CID) को सौंप दी गई।
विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर के इस बड़े विवाद के कारण शोभनदेव चट्टोपाध्याय को अब तक विधानसभा में विरोधी दल के नेता की आधिकारिक मान्यता नहीं मिल सकी है, और अब सीआईडी जांच ने टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।