नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अल नीनो को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि पहले से ही गर्म हो रही पृथ्वी पर अल नीनो की वजह से तापमान और तेजी से बढ़ सकता है, जिससे दुनिया को गंभीर जलवायु संकट का सामना करना पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 2026-27 में बनने वाला अल नीनो अब तक का सबसे शक्तिशाली साबित हो सकता है, जिससे वैश्विक तापमान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूटने की आशंका है।
‘पहले से गर्म धरती पर और बढ़ेगा तापमान’
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी पहले ही असामान्य रूप से गर्म हो रही है और ऐसे में अल नीनो इस गर्मी को और बढ़ा देगा। उन्होंने दुनिया के देशों से तुरंत एहतियाती कदम उठाने की अपील की है ताकि इसके प्रभावों को कम किया जा सके।
वैज्ञानिकों ने जताई रिकॉर्ड तोड़ अल नीनो की आशंका
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के अनुमान के मुताबिक, 2026 के अंत तक मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि 1997-98 और 2015-16 जैसे पहले के शक्तिशाली अल नीनो से भी अधिक हो सकती है, जिससे यह अब तक की सबसे गंभीर जलवायु घटना बन सकती है।
दुनिया भर में असर पड़ने की आशंका
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की वजह से वैश्विक मौसम पैटर्न बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
क्या है अल नीनो और कैसे करता है असर
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है जो हर 2 से 7 साल में होता है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे ट्रेड विंड्स कमजोर पड़ जाती हैं। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम और बारिश के पैटर्न पर पड़ता है, जिससे कई क्षेत्रों में असामान्य मौसम की स्थिति बन जाती है।