कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा भंडार' योजना अपने आवेदन पत्र (फॉर्म) को लेकर चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गई है। राज्य सरकार ने हाल ही में इस योजना का आधिकारिक फॉर्म जारी किया है, लेकिन इसके लंबे और बेहद जटिल होने के कारण आम लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। इसी सिलसिले में पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने आवेदन पत्र को तुरंत सरल करने की मांग की है।
कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने अपने पत्र में योजना की सराहना करते हुए लिखा है कि एक जिम्मेदार विपक्ष होने के नाते वे इस 12 पन्नों के फॉर्म को भरने में आम जनता को हो रही भारी दिक्कतों और उनके मन में पैदा हो रहे संशयों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि आम लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए इस जटिल फॉर्म का सरलीकरण (Simplification) करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
आखिर 12 पन्नों के इस फॉर्म में ऐसा क्या है, जिस पर हो रहा है विवाद?
यह फॉर्म केवल आवेदक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरे परिवार का विस्तृत ब्योरा (कुंडली) मांग लिया गया है। फॉर्म में मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां मांगी गई हैं:
परिवार की आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति: परिवार के सभी सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता, उनकी कमाई का जरिया और वे किस तरह के रोजगार में लगे हैं, इसकी पूरी जानकारी देनी होगी।
सरकारी नौकरी और पेंशन: परिवार का कोई सदस्य राज्य या केंद्र सरकार की नौकरी में है या नहीं, या किसी को पेंशन मिलती है या नहीं, इसकी बारीक जानकारी मांगी गई है।
संपत्ति और वाहन: परिवार के कुल सदस्यों की संख्या, घर का प्रकार (कच्चा या पक्का), कुल जमीन की मात्रा और घर में कोई वाहन (गाड़ी) है या नहीं, इसका विवरण भी अनिवार्य है।
दस्तावेज और टैक्स: परिवार के सदस्यों के बैंक खातों का विवरण, उनके वोटर कार्ड और पैन कार्ड (PAN Card) के नंबर तथा परिवार में कोई आयकर (Income Tax) देता है या नहीं, यह भी बताना होगा।
CAA और नागरिकता से जुड़े सवाल: सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि फॉर्म में यह भी पूछा गया है कि क्या परिवार के किसी सदस्य ने सीएए (CAA) के तहत आवेदन किया है, या एसआईआर (SIR) से किसी का नाम छूटा है और क्या इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की गई है।
सरकार क्यों मांग रही है इतनी विस्तृत जानकारी? सीएम शुभेंदु अधिकारी ने दिया जवाब
इस जटिल फॉर्म को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य की माताओं और बहनों को हर महीने 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता देना चाहती है, लेकिन साथ ही वह परिवारों का सटीक डेटा भी एकत्र करना चाहती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य और केंद्र की विभिन्न सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों को ही मिले।
मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि भले ही फॉर्म में कई जानकारियां मांगी गई हैं, लेकिन इसे भरने में सरकार आम जनता की पूरी मदद करेगी। इसके लिए बीडीओ (BDO) कार्यालयों के माध्यम से विधायकों को इस कार्य में जोड़ा जाएगा और विभिन्न जन कल्याण शिविरों (कैंपों) में भी फॉर्म भरने में सहायता प्रदान की जाएगी।
'लक्ष्मी भंडार' की गलतियों से लिया सबक
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के अमल में शुरू हुई लक्ष्मी भंडार योजना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान लक्ष्मी भंडार योजना में लगभग 30 लाख ऐसे फर्जी लाभार्थी पाए गए हैं, जो इस सरकारी अनुदान को पाने के पात्र (Eligible) ही नहीं थे।
इसीलिए नई सरकार अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत से ही अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। फॉर्म के माध्यम से जुटाई गई परिवार के सभी सदस्यों की विस्तृत जानकारी की कड़ाई से जांच की जाएगी, ताकि यह तय किया जा सके कि आवेदन करने वाली महिला वास्तव में 3,000 रुपये प्रति माह की इस सहायता राशि को पाने की हकदार है या नहीं।