कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित “सिग्नेचर स्कैम” को लेकर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में जमा कराए गए एक आधिकारिक पत्र के हस्ताक्षरों को लेकर उठे विवाद के बाद राज्य की जांच एजेंसी CID लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी सिलसिले में गुरुवार को CID की टीम तृणमूल कांग्रेस के चार विधायकों के घर पहुंची।
जांच के दायरे में आए नेताओं में कुणाल घोष, नैना बंद्योपाध्याय, बहारुल इस्लाम और तापस माइती शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा सचिव को एक पत्र सौंपा गया था, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी। बाद में आरोप लगा कि उस पत्र में मौजूद कुछ हस्ताक्षर और विधायकों के आधिकारिक हस्ताक्षरों में मेल नहीं है।
इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा की तरफ से पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद CID जांच में जुट गई।
नैना बंद्योपाध्याय से हुई पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, CID की टीम दो बार विधायक नैना बंद्योपाध्याय के घर पहुंची। पहली बार वह घर पर मौजूद नहीं थीं, लेकिन बाद में अधिकारियों ने उनसे बातचीत की। जांच टीम ने उनसे संबंधित दस्तावेज और हस्ताक्षर को लेकर सवाल किए।
नैना ने दावा किया कि पत्र में हस्ताक्षर के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी, इसलिए उन्हें अलग तरीके से साइन करना पड़ा।
कुणाल घोष घर पर नहीं मिले
वहीं CID की दूसरी टीम कुणाल घोष के घर भी पहुंची, लेकिन वह उस समय घर पर मौजूद नहीं थे। अधिकारियों ने उनसे फोन पर बातचीत की। बताया जा रहा है कि वह अगले कुछ दिनों में खुद जाकर जांच अधिकारियों को जवाब देंगे।
हस्तलेख विशेषज्ञ की भी मदद
सूत्रों के मुताबिक, जांच में हस्तलेख विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। CID पूरे मामले में दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की बारीकी से जांच कर रही है। इस विवाद के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।