हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब यह अमावस्या अधिकमास यानी मलमास में आती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास की अंतिम अमावस्या 15 जून को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, स्नान-दान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।
कब है ज्येष्ठ अमावस्या 2026?
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगी और इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार व्रत, स्नान, दान और पूजा-पाठ 15 जून को किए जाएंगे।
शुभ मुहूर्त
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 7:19 बजे से 7:39 बजे तक |
इन शुभ मुहूर्तों में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना गया है।
क्यों खास होती है अधिकमास की अमावस्या?
अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। अमावस्या तिथि पितरों को स्मरण करने और तर्पण करने के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से-
परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
शुभ कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं।
पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
घर में समृद्धि और खुशहाली आती है।
इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा
1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना शुभ माना जाता है।
2. भगवान विष्णु का पूजन करें
घर के मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उन्हें—
पीले फूल
तुलसी दल
चंदन
पीले वस्त्र
अर्पित करें।
3. घी का दीपक जलाएं
विधिपूर्वक पूजा करते हुए घी का दीपक जलाएं और भगवान श्रीहरि का ध्यान करें।
4. मंत्र जाप करें
पूजा के दौरान-
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
मंत्र का जाप करें। इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम और श्रीहरि स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
5. सात्विक भोग लगाएं
भगवान विष्णु को खीर, पंचामृत, फल और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करें तथा परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
पितरों के लिए करें तर्पण और दान
अमावस्या तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण और दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार—
अन्न
वस्त्र
फल
जल
दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है।
इसके अलावा गाय, पक्षियों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इससे पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अधिकमास अमावस्या का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास की अंतिम अमावस्या पर भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है, उन्हें इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करना चाहिए। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।