हिंदू पंचांग के अनुसार इस समय अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास चल रहा है, जिसे मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह विशेष मास हर तीन वर्ष में एक बार आता है और भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है। 17 मई से शुरू हुआ ज्येष्ठ अधिकमास अब अपने अंतिम चरण में है और इसका समापन 15 जून 2026 को हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास के दौरान स्नान, दान, जप, तप और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व होता है। हालांकि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, नामकरण और मुंडन जैसे शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। ऐसे में मलमास समाप्त होने के बाद एक बार फिर शुभ कार्यों की शुरुआत होगी, लेकिन यह अवसर ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा।
15 जून के बाद फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
मलमास समाप्त होने के बाद 19 जून से विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने से पहले तक ही मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। इसलिए जिन लोगों के घर विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ आयोजन प्रस्तावित हैं, उन्हें 25 जुलाई से पहले इन्हें संपन्न कर लेना चाहिए।
जून 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
मलमास समाप्त होने के बाद जून में विवाह के लिए कई शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी।
19 जून
21 जून
22 जून
23 जून
24 जून
25 जून
26 जून
27 जून
28 जून
29 जून
जुलाई 2026 में केवल चार शुभ मुहूर्त
जुलाई महीने में विवाह के लिए कुल चार शुभ तिथियां रहेंगी—
1 जुलाई
6 जुलाई
7 जुलाई
11 जुलाई
इसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाने के कारण चार महीने तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
क्या है चातुर्मास और इसका धार्मिक महत्व?
सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के शुभ कार्य स्थगित माने जाते हैं। इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।
25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई, शनिवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होगी। यह अवधि लगभग 119 दिनों तक चलेगी और 20 नवंबर, शुक्रवार को देवउठनी एकादशी के दिन समाप्त होगी। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, चूंकि 25 जुलाई से चार माह का चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा, इसलिए उससे पहले ही सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य संपन्न कर लेना बेहतर रहेगा।
मलमास में क्या करना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास में-
भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
गंगा स्नान, दान-पुण्य और व्रत का विशेष महत्व होता है।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है।
आध्यात्मिक साधना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना लाभकारी माना जाता है।