अगर आपके घर में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन या कोई बड़ा मांगलिक कार्यक्रम होने वाला है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 11 जुलाई 2026 के साथ इस विवाह सीजन का समापन हो रहा है और इसके बाद करीब चार महीने तक विवाह समेत अधिकांश शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसकी वजह केवल चातुर्मास ही नहीं, बल्कि गुरु तारा अस्त, देवशयन, श्राद्ध पक्ष, शुक्र तारा अस्त और खरमास जैसे कई धार्मिक एवं ज्योतिषीय योग हैं। ऐसे में लाखों परिवारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब अगली शादी कब होगी? नवंबर और दिसंबर में कितने शुभ मुहूर्त हैं? क्या चातुर्मास में कोई अपवाद भी है? इस लेख में आपको इन सभी सवालों के विस्तृत जवाब, शुभ तिथियों की पूरी सूची और प्रत्येक धार्मिक कारण की आसान व्याख्या मिलेगी।
11 जुलाई के बाद क्यों रुक जाएंगे शुभ कार्य?
जुलाई के दूसरे सप्ताह के बाद धार्मिक पंचांग में ऐसे कई संयोग बन रहे हैं, जिनमें विवाह और अन्य मांगलिक कार्य करने की परंपरा नहीं है। इसी कारण शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, देव प्रतिष्ठा जैसे अधिकांश शुभ कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं।
चातुर्मास क्या होता है?
चातुर्मास सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक काल माना जाता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी के बाद पुनः जागृत होते हैं। इस अवधि में अधिकांश स्थानों पर विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
गुरु तारा अस्त का क्या प्रभाव पड़ता है?
ज्योतिष शास्त्र में गुरु (बृहस्पति) को विवाह, ज्ञान और शुभ कार्यों का प्रमुख कारक माना जाता है। इस वर्ष-
16 जुलाई को गुरु तारा अस्त होगा।
9 अगस्त को पुनः उदय होगा।
परंपरा के अनुसार गुरु के अस्त होने से पहले और उदय के बाद कुछ दिनों तक भी विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।
देवशयन कब से शुरू होगा?
इस वर्ष 25 जुलाई से भगवान विष्णु के शयन का काल शुरू होगा। यह अवधि लगभग 20 नवंबर तक मानी जाएगी। इसी कारण देश के अधिकांश हिस्सों में विवाह नहीं होंगे, हालांकि कुछ क्षेत्रों और परंपराओं में अलग मान्यताएं हो सकती हैं।
श्राद्ध पक्ष में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक महालय श्राद्ध पक्ष रहेगा। यह समय पितरों के तर्पण और श्रद्धांजलि के लिए समर्पित माना जाता है। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
शुक्र तारा अस्त का क्या महत्व है?
शुक्र ग्रह को वैवाहिक सुख, समृद्धि और दांपत्य जीवन का कारक माना जाता है।
14 अक्टूबर को शुक्र अस्त होगा।
28 अक्टूबर को पुनः उदय होगा।
इस अवधि में भी विवाह मुहूर्त नहीं माने जाते।
क्या चातुर्मास में कोई अपवाद भी है?
हाँ। 22 जुलाई को भड़ली नवमी का अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन कई स्थानों पर बिना पंचांग देखे विवाह करने की परंपरा है। हालांकि यह स्थानीय परंपराओं और पारिवारिक मान्यताओं पर निर्भर करता है।
नवंबर 2026 के विवाह मुहूर्त
चार महीने के लंबे इंतजार के बाद नवंबर में फिर से शहनाइयां गूंजेंगी।
नवंबर 2026 की शुभ तिथियां
21 नवंबर
24 नवंबर
25 नवंबर
26 नवंबर
दिसंबर 2026 के विवाह मुहूर्त
दिसंबर में भी विवाह के कई शुभ अवसर उपलब्ध रहेंगे।
दिसंबर 2026 की शुभ तिथियां
2 दिसंबर
3 दिसंबर
11 दिसंबर
12 दिसंबर
शादी की तैयारी कर रहे परिवारों को क्या करना चाहिए?
यदि आपका विवाह नवंबर या दिसंबर में प्रस्तावित है, तो-
विवाह स्थल की बुकिंग समय रहते करें।
बैंक्वेट, कैटरिंग और फोटोग्राफी पहले से तय करें।
शुभ मुहूर्त के अनुसार पंडित से समय की पुष्टि कर लें।
स्थानीय पंचांग या पारिवारिक परंपरा का भी ध्यान रखें।
FAQs
1. इस सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त कब है?
11 जुलाई 2026।
2. चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?
25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 तक।
3. क्या चातुर्मास में शादी हो सकती है?
सामान्यतः अधिकांश परंपराओं में नहीं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में अलग मान्यताएं हो सकती हैं।
4. नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से हैं?
21, 24, 25 और 26 नवंबर।
5. दिसंबर 2026 में शादी के लिए कौन-सी तारीखें शुभ हैं?
2, 3, 11 और 12 दिसंबर।
निष्कर्ष
11 जुलाई के बाद धार्मिक और ज्योतिषीय कारणों से लगभग चार महीने तक अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसके बाद नवंबर के उत्तरार्ध से विवाह का नया सीजन शुरू होगा। यदि आपके परिवार में शादी की तैयारी चल रही है, तो नवंबर और दिसंबर के उपलब्ध शुभ मुहूर्तों के अनुसार पहले से योजना बनाना सुविधाजनक रहेगा। अंतिम मुहूर्त और लग्न के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य से परामर्श करना उचित रहेगा।