वैश्विक जलवायु परिवर्तन को लेकर किए गए एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि पिछले दशक में धरती के तापमान में वृद्धि की गति पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है। वैज्ञानिकों ने 98 प्रतिशत निश्चितता के साथ निष्कर्ष निकाला है कि हाल के वर्षों में तापमान बढ़ने की प्रक्रिया केवल जारी ही नहीं है बल्कि उसकी रफ्तार भी तेज हो चुकी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई वर्षों से इसके संकेत दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब पहली बार वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर इस तेजी की पुष्टि की गई है।
प्राकृतिक कारणों को अलग कर किया गया विश्लेषण
शोध दल ने अपने अध्ययन में तापमान पर असर डालने वाले प्राकृतिक कारकों को अलग करके विश्लेषण किया। इनमें अल नीनो जैसी समुद्री घटनाएं, ज्वालामुखी विस्फोट तथा सूर्य की ऊर्जा में उतार-चढ़ाव जैसे कारक शामिल हैं। इन प्रभावों को सांख्यिकीय पद्धति से अलग करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि तापमान वृद्धि की मूल प्रवृत्ति में स्पष्ट रूप से तेजी आई है और यह परिवर्तन सांख्यिकीय रूप से भी महत्वपूर्ण है।
पिछले दशक में तापमान वृद्धि की दर
अध्ययन के अनुसार पिछले दस वर्षों में वैश्विक तापमान बढ़ने की दर लगभग 0.35 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक आंकी गई है। यह दर 1970 से 2015 के बीच दर्ज औसत दर से काफी अधिक है, जो लगभग 0.2 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक के आसपास थी। वैज्ञानिकों ने इस अंतर को बेहद महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि आधुनिक तापमान रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से किसी भी दशक में इतनी तेज वृद्धि दर्ज नहीं की गई थी।
डेढ़ डिग्री सीमा का लगातार उल्लंघन
जलवायु निगरानी संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार हाल के तीन वर्षों में वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा है। यह पहली बार है जब लगातार तीन वर्षों तक तापमान इस महत्वपूर्ण सीमा से ऊपर दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए गंभीर चेतावनी है।
हाल के वर्षों में असामान्य तापमान उछाल
भूमि तापमान के विश्लेषण पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने भी चेतावनी दी है कि 2023 से 2025 के बीच तापमान में जो उछाल दर्ज किया गया है वह पिछले कई दशकों के अपेक्षाकृत स्थिर रुझान से अलग दिखाई देता है। यदि 1970 से 2019 के बीच की औसत गति को आधार माना जाए तो हाल का तापमान उछाल उस रुझान से सबसे बड़ा विचलन माना जा सकता है।
जलवायु संकट को लेकर बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान वृद्धि की यह तेजी भविष्य में चरम मौसम घटनाओं, समुद्र स्तर में बढ़ोतरी और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि उत्सर्जन में कमी लाने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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