नई दिल्ली। देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मौसम ने अचानक अपना रुख बदल लिया है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और हरियाणा के आसपास विकसित हुए चक्रवाती परिसंचरण के संयुक्त प्रभाव से अगले दो दिनों तक कई राज्यों में अस्थिर मौसम की स्थिति बनी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रणाली के कारण तेज हवाओं, गरज-चमक और वर्षा की गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे तापमान में गिरावट तो आएगी, लेकिन आंधी और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।
पंजाब से उत्तर प्रदेश तक तेज आंधी और ओलावृष्टि की आशंका
मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इन क्षेत्रों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज हवाओं के कारण पेड़ों और बिजली के ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है, जबकि किसानों को भी अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।
बिहार, झारखंड और ओडिशा में मानसून ने बढ़ाई रफ्तार
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूर्वी भारत में अपनी प्रगति तेज कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार, झारखंड और ओडिशा के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रूप से प्रवेश कर चुका है। इन क्षेत्रों में आगामी दिनों में वर्षा की तीव्रता और बढ़ने की संभावना है। मानसून की सक्रियता से जहां किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं निचले इलाकों में जलभराव और यातायात संबंधी समस्याओं की आशंका भी बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और स्थानीय प्रशासन को आवश्यक तैयारियां रखने की सलाह दी गई है।
मानसून की उत्तरी सीमा लगातार बढ़ रही आगे
मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अब देश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। वर्तमान परिस्थितियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि आने वाले दो से तीन दिनों में मानसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना तथा मध्य भारत के अन्य हिस्सों में और आगे बढ़ सकता है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के शेष क्षेत्रों में भी मानसून के विस्तार के लिए वातावरण पूरी तरह अनुकूल बना हुआ है। यह प्रगति कृषि गतिविधियों और जल संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
देश में मौसम के दो अलग-अलग चेहरे
पिछले चौबीस घंटों के दौरान देश में मौसम के दो बिल्कुल अलग रूप देखने को मिले हैं। एक ओर दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में रहे। यह स्थिति भारत की विविध जलवायु परिस्थितियों को दर्शाती है, जहां एक ही समय में कुछ क्षेत्र बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं तो कुछ क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोप जारी रह सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में भी यह विरोधाभासी स्थिति कुछ समय तक बनी रह सकती है।
किसानों और आम नागरिकों के लिए बढ़ी चुनौती
तेज आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार फसलों और बागवानी उत्पादों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। वहीं शहरी क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी वर्षा के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए खुले स्थानों में रहने से बचने की सलाह भी दी गई है।
अगले 48 घंटे रहेंगे निर्णायक
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 48 घंटे कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी गतिविधियों का संयुक्त प्रभाव मौसम को और अधिक सक्रिय बना सकता है। यदि वर्तमान प्रणाली अपेक्षित रूप से आगे बढ़ती है तो कई क्षेत्रों में अच्छी वर्षा देखने को मिलेगी, लेकिन इसके साथ तेज हवाओं और ओलावृष्टि का खतरा भी बना रहेगा। ऐसे में नागरिकों, किसानों और स्थानीय प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है ताकि किसी भी संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।