प्रयागराज: लगातार हो रही बारिश और गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर ने प्रयागराज में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। पिछले 24 घंटों में फाफामऊ में गंगा का जलस्तर एक मीटर से अधिक बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। सोमवार सुबह फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.62 मीटर और छतनाग में 81.68 मीटर दर्ज किया गया। वहीं नैनी में यमुना नदी का पानी 82.20 मीटर तक पहुंच गया। शहर में बाढ़ के खतरे का निशान 84.734 मीटर निर्धारित है। तेजी से बढ़ते जलस्तर का असर अब नदी किनारे और निचले इलाकों में दिखाई देने लगा है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
अगले 24 घंटे बेहद अहम, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आने वाले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते पानी के कारण जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है। अगर पानी बढ़ने की रफ्तार इसी तरह जारी रही, तो शहर के कुछ और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच सकता है। प्रशासन ने नदी और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। राहत और बचाव दलों को तैयार रखा गया है, जबकि अधिकारी लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। लोगों को अनावश्यक रूप से नदी किनारे नहीं जाने की सलाह दी गई है। साथ ही जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

छोटा बघाड़ा से राजापुर तक असर, घरों के बाहर पहुंचा पानी
गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर प्रयागराज के कई निचले रिहायशी इलाकों में दिखने लगा है। छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, राजापुर और रसूलाबाद जैसे इलाकों में पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया है। कई स्थानों पर सड़कों पर जलभराव होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। तटवर्ती सड़कों और घाटों के डूबने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है। रोजमर्रा के काम और आने-जाने के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों और परिवारों में भी बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता का माहौल है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में भी संकट, खेतों में भरा पानी
बाढ़ का असर केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में भी हालात बिगड़ने लगे हैं। मेजा तहसील के आसपास कई स्थानों पर नदियों का पानी खेतों तक पहुंच गया है। पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। कुछ जगहों पर पानी महत्वपूर्ण सुविधाओं और पावर हाउस के आसपास तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। सिरसा घाट पर स्टीमर सेवा को एहतियातन बंद कर दिया गया है। बारिश के कारण पुलिया बहने और सड़कों पर गड्ढे बनने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन और पुलिस ने लोगों को नदी के आसपास जाने से बचने तथा खराब रास्तों पर सावधानी से चलने की अपील की है।
नाव और राहत टीमों की व्यवस्था, बचाव के लिए तैयारी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। जरूरत वाले क्षेत्रों में नावों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जलभराव की स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित परिवारों को जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों तक पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है। शिविरों में भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में हालात का जायजा ले रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।