कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी और ऐतिहासिक हार के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी आखिरकार जमीन पर उतरने जा रहे हैं। चुनावी नतीजे आने के बाद से अब तक सार्वजनिक रूप से गायब रहे अभिषेक बनर्जी शनिवार को पहली बार सड़कों पर दिखेंगे। बताया जा रहा है कि वह चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा (Post-Poll Violence) का शिकार हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने और उनसे मुलाकात करने खुद उनके घर जाएंगे।
नतीजों के बाद से अभिषेक बनर्जी केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर वीडियो संदेश जारी करने या ममता बनर्जी के आवास पर हुई बंद कमरे की बैठकों में ही नजर आए थे। कालीघाट स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक दौरा होगा।
सोनारপুর और बेलेघाटा का करेंगे दौरा
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार को अभिषेक बनर्जी दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे:
सोनारपुर दक्षिण: यहां वह हिंसा का शिकार हुए टीएमसी कार्यकर्ता संजू कर्मकार से मुलाकात करेंगे।
बेलेघाटा: इस इलाके में वह अपनी पार्टी के एक अन्य घायल कार्यकर्ता विश्वजीत पटनायक के घर जाकर उनसे मिलेंगे।
अपनों के ही निशाने पर थे अभिषेक, कुणाल घोष ने भी उठाए थे सवाल
दरअसल, चुनाव नतीजों के बाद से बंगाल के कई हिस्सों से टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरें आ रही थीं। ऐसे संकट के समय में भी अभिषेक बनर्जी के सड़क पर न उतरने को लेकर खुद टीएमसी के अंदर ही असंतोष पनपने लगा था। हाल ही में बेलेघाटा के निवर्तमान विधायक कुणाल घोष ने भी खुलकर सवाल उठाया था कि कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं, तो नेतृत्व चुप क्यों है?
दिलचस्प बात यह है कि अब अभिषेक बनर्जी उसी बेलेघाटा इलाके में जा रहे हैं। इसके साथ ही, हाल ही में अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में भी कटौती की गई है, जिसके बाद सुरक्षा प्रतिबंधों के बीच उनका यह पहला बड़ा दौरा होगा।
क्या 'बागी' नेताओं को देंगे कोई कड़ा संदेश?
इस चुनाव में 15 साल बाद सत्ता गंवाने वाली टीएमसी के भीतर इस वक्त भारी अंतर्कलह मची हुई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने इस करारी हार का ठीकरा सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी और पार्टी की चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के सिर फोड़ा है। पार्टी के भीतर हर दिन कोई न कोई नेता बागी सुर अख्तियार कर रहा है।
ऐसे तनावपूर्ण माहौल में शनिवार को अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम से अभिषेक बनर्जी इन 'बागी' और नाराज नेताओं को क्या संदेश देते हैं और बिखरती पार्टी को एकजुट करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं, इस पर पूरे राजनीतिक हलके की नजरें टिकी हुई हैं।