कोलकाता/सोनारपुर: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में शनिवार को हुए भीषण हमले के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान सामने आया है। उग्र भीड़ के हाथों थप्पड़-घूंसे खाने, कपड़ों के बटन टूटने और अंडे-जूते बरसाए जाने के बाद किसी तरह हेलमेट पहनकर मृतक टीएमसी कार्यकर्ता संजू कर्मकार के घर पहुंचे अभिषेक बनर्जी ने इस घटना को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
पीड़ित परिवार के घर के भीतर से बेहद आक्रोशित लहजे में मीडिया से बात करते हुए अभिषेक ने कहा,
"मुझे जान से मारने की कोशिश की जा रही है। मार देने दीजिए मुझे, लेकिन मैं भी इस तांडव का अंत देखकर ही दम लूंगा।"
"एक भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था, दरवाजा तोड़ने की हुई कोशिश"
अभिषेक बनर्जी ने राज्य की नई सुवेंदु अधिकारी सरकार के तहत काम कर रही कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार सूचित किए जाने के बावजूद मौके पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे।
अभिषेक बनर्जी के बयान के मुख्य बिंदु:
पुलिस की लापरवाही: अभिषेक ने कहा, "अभी सरकार बने एक महीना भी नहीं हुआ है और राज्य की यह स्थिति हो गई है। पुलिस को बार-बार बताने के बाद भी ऐसी परिस्थिति बनी। यहाँ मौके पर एक भी पुलिसवाला मौजूद नहीं था।"
दरवाजा तोड़ने का प्रयास: उन्होंने दावा किया कि जब वे मृतक कार्यकर्ता के घर के भीतर थे, तब बाहर खड़ी उग्र भीड़ ने घर का दरवाजा तक तोड़ने की कोशिश की।
कोर्ट जाएंगे अभिषेक: टीएमसी सांसद ने साफ किया कि वे आज के इस जानलेवा हमले और सुरक्षा में हुई भारी चूक को लेकर बहुत जल्द अदालत (Court) का दरवाजा खटखटाएंगे।
कार्यकर्ताओं को निर्देश: उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं से अपील की कि जहां भी ऐसी हिंसक घटनाएं या हमले हों, तुरंत उसका वीडियो या विवरण पुलिस को व्हाट्सएप (WhatsApp) पर भेजें ताकि भविष्य के लिए पुख्ता रिकॉर्ड रहे।
कुणाल घोष ने राजीव गांधी की हत्या का जिक्र कर जताई चिंता
इस हमले के बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर इस घटना की तीखी निंदा की और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
कुणाल घोष ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा:"सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और अभद्रता का मैं तीव्र विरोध करता हूं। सुरक्षा हटाकर इस तरह के हमले कराने का हश्र हम पहले 'राजीव गांधी' के समय देख चुके हैं। आज फिर वही प्रवृत्ति दिखाई दे रही है। आखिर यह सब कैसे हुआ? पुलिस प्रशासन उस वक्त क्या कर रहा था? क्यों अभिषेक को घेरकर इतने लंबे समय तक यह तांडव चलने दिया गया?"
क्या था पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा (Post-Poll Violence) में मारे गए संजू कर्मकार के परिजनों से मिलने के लिए अभिषेक बनर्जी शनिवार को सोनारपुर जा रहे थे। रास्ते में कालीघाट पर सीआईडी (CID) का नोटिस लेने के बाद जब वे पाटुली ढलाई ब्रिज और कमराबाद होते हुए सोनारपुर पहुंचे, तो भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया।
भीड़ के उग्र रूप को देख चार पहिया गाड़ी छोड़ वे जैसे ही बाइक पर सवार हुए, उन पर थप्पड़ और घूंसे बरसाए गए। खुद को बचाने के लिए उन्हें क्रिकेट का हेलमेट पहनना पड़ा, जिसके बाद भी उन पर लगातार अंडे, पत्थर और जूते फेंके गए। इस घटना के बाद से पूरे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है।