उत्तर 24 परगना के निमता की रहने वाली अद्रीजा गण ने अपनी मेहनत और जज्बे से पूरे राज्य में मिसाल कायम कर दी है। रामकृष्ण सारदा मिशन सिस्टर निवेदिता गर्ल्स स्कूल की छात्रा अद्रीजा ने पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक परीक्षा 2026 में 487 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से राज्य में 10वां स्थान हासिल किया। यह सफलता केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जीवन और संघर्ष पर मिली एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
2.5 साल लंबा संघर्ष, 82 कीमोथेरेपी से लड़ी जिंदगी की जंग
अद्रीजा की मुश्किल यात्रा साल 2018 में शुरू हुई जब वह छठी कक्षा में थीं और उन्हें ‘टी-सेल लिंफोमा’ नामक कैंसर का पता चला। इसके बाद लगभग ढाई साल तक उनका जीवन अस्पतालों और इलाज के बीच सीमित रहा। पिता जयमंगल गण के अनुसार यह समय परिवार के लिए बेहद कठिन था। अद्रीजा को मुंबई और कोलकाता के टाटा कैंसर अस्पताल में 82 बार कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा। जून 2021 में उनका मुख्य इलाज पूरा हुआ, लेकिन आज भी वे नियमित जांच के लिए अस्पताल जाती हैं। इस कठिन समय में उनकी मां ज्योति गण ने मुंबई में रहकर अकेले उनकी देखभाल और इलाज की जिम्मेदारी संभाली।
शिक्षा में शानदार प्रदर्शन और भविष्य के बड़े सपने
अद्रीजा ने आर्ट्स स्ट्रीम में पढ़ाई करते हुए भूगोल, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर और मनोविज्ञान जैसे विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अब उनका सपना बेथून कॉलेज से मनोविज्ञान (Psychology) में स्नातक करने का है। वे आगे चलकर डिप्रेशन और मानव व्यवहार जैसे विषयों पर काम करना चाहती हैं। पढ़ाई के अलावा उन्हें शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का साहित्य और चिकन बिरयानी बेहद पसंद है। अद्रीजा का कहना है कि जीवन में सबसे जरूरी चीज लगातार कोशिश करना है, “बस कोशिश करते रहिए, कोशिश ही सबसे ज्यादा मायने रखती है।”