कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अर्जुन सिंह एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने पिछले तीन दशकों में कई बड़े राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। कांग्रेस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले अर्जुन सिंह ने तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों दलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2026 विधानसभा चुनाव में नोआपाड़ा सीट से जीत हासिल कर उन्होंने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की है।
कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत, भाटपाड़ा से बनाई पहचान
2 अप्रैल 1962 को उत्तर 24 परगना जिले में जन्मे अर्जुन सिंह के पिता सत्यनारायण सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भाटपाड़ा से तीन बार विधायक रहे थे। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े अर्जुन सिंह ने 1995 में कांग्रेस के टिकट पर भाटपाड़ा नगरपालिका चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और 2001 में पहली बार भाटपाड़ा विधानसभा सीट से विधायक बने। इसके बाद लगातार चार बार इस सीट पर जीत दर्ज कर उन्होंने इलाके में मजबूत जनाधार स्थापित किया।
टीएमसी में बढ़ता कद और राष्ट्रीय जिम्मेदारियां
तृणमूल कांग्रेस में अर्जुन सिंह ने हिंदी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के रूप में काम किया। उन्हें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। वे भाटपाड़ा नगरपालिका के चेयरमैन भी रहे। 2004 लोकसभा चुनाव में उन्होंने बैरकपुर सीट से तृणमूल उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
2019 में बीजेपी में शामिल होकर बने सांसद
मार्च 2019 में अर्जुन सिंह ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने बैरकपुर लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और तत्कालीन तृणमूल उम्मीदवार दिनेश त्रिवेदी को हराकर सांसद बने। उनकी जीत को भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल में बड़ी राजनीतिक सफलता माना गया। 2020 में उन्हें भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई का उपाध्यक्ष भी बनाया गया।
टीएमसी में वापसी और फिर बीजेपी में लौटे
मई 2022 में बैरकपुर क्षेत्र की जूट मिलों के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से नाराजगी जताने के बाद अर्जुन सिंह ने भाजपा छोड़कर फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी की। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 से पहले टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 15 मार्च 2024 को एक बार फिर भाजपा का दामन थाम लिया।
2026 में नोआपाड़ा से जीत, बैरकपुर क्षेत्र में भाजपा को मिली मजबूती
4 मई 2026 को हुए विधानसभा चुनाव में अर्जुन सिंह ने नोआपाड़ा विधानसभा सीट से जीत हासिल की। भाजपा का दावा है कि उनके संगठनात्मक सहयोग और चुनावी रणनीति के कारण बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कई विधानसभा सीटों पर पार्टी को मजबूती मिली।
राजनीतिक संघर्ष और विवादों से भी रहा नाता
अर्जुन सिंह का राजनीतिक सफर कई संघर्षों से भरा रहा है। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए और उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान किया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद उनके घर तथा कार्यालय पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने भी विभिन्न मामलों में उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा की जाने वाली कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की थी।
विवादों में भी रहे चर्चा का केंद्र
अर्जुन सिंह का नाम कई विवादों से भी जुड़ा रहा है। उत्तर 24 परगना में तृणमूल कार्यकर्ताओं पर गोली चलाने के आरोप में उनके खिलाफ अदालत द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। हालांकि, इन मामलों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार चलता रहा है।
बैरकपुर की राजनीति का प्रभावशाली चेहरा
भाटपाड़ा के स्थानीय नेता से लेकर सांसद और अब विधायक तक का सफर तय करने वाले अर्जुन सिंह आज भी बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। लगातार दल बदलने के बावजूद क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ बनी हुई है, जो उन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण चेहरा बनाती है।