कोलकाता: कोलकाता के बहुचर्चित ‘मेसिकांड’ मामले में अपने खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने और कानूनी सुरक्षा की मांग को लेकर राज्य के पूर्व बिजली और खेल मंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस नेता अरूप विश्वास ने कोलकाता हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल करने की अनुमति और मामले की जल्द सुनवाई की अपील की है।
अदालत में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि अरूप विश्वास के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को चुनौती देने की अनुमति दी जाए और इसे जल्द सूचीबद्ध किया जाए। हालांकि न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तुरंत कोई राहत या सुनवाई की तारीख तय नहीं की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पहले याचिका विधिवत दाखिल की जाए, उसके बाद ही मामले पर विचार किया जाएगा।
पुलिस की सख्ती और नोटिस
इधर, दूसरे समन के 24 घंटे के भीतर ही बिधाननगर पुलिस रविवार को अरूप विश्वास के आवास पर पहुंच गई। पुलिस ने उनके घर पर नोटिस चिपकाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि उन्हें सोमवार को अनिवार्य रूप से थाने में पेश होना होगा। पुलिस ने यह भी कहा कि बीमारी का जो दावा किया गया है, उसके समर्थन में कोई ठोस मेडिकल प्रमाण नहीं दिया गया, इसलिए दो सप्ताह का समय देने की मांग को खारिज कर दिया गया। उन्हें सुबह 11 बजे बिधाननगर दक्षिण थाने में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया, अन्यथा आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
मेसी कार्यक्रम से जुड़ा विवाद
पूरा मामला पिछले साल दिसंबर में युवाभारती स्टेडियम में अर्जेंटीना के विश्व कप विजेता फुटबॉलर लियोनेल मेसी के दौरे से जुड़ा है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान आम दर्शकों को नजरअंदाज कर अरूप विश्वास और उनके करीबी लोगों ने विशेष पहुंच और लाभ लिया था।
FIR और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
इस विवाद के बाद कार्यक्रम के आयोजक सत्रदु दत्ता को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने अरूप विश्वास सहित कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर बिधाननगर दक्षिण थाने में एफआईआर दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार, अरूप विश्वास के खिलाफ कुल पाँच गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है, जिसको लेकर अब कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है।