पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। हर मोर्चे पर विपक्ष के हमलों का करारा जवाब देने वाले टीएमसी के मुख्य प्रवक्ता और कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड नंबर 98 के पार्षद अरूप चक्रवर्ती के सुर अब पूरी तरह बागी हो गए हैं। अरूप चक्रवर्ती ने कोलकाता नगर निगम की म्यूनिसिपल अकाउंट्स कमेटी और पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, नागरिकों की सहूलियत और रोजमर्रा के कामों (दस्तखत की जरूरत) को देखते हुए उन्होंने फिलहाल पार्षद का पद नहीं छोड़ा है, लेकिन संकेत दिए हैं कि वह इसे भी ज्यादा दिनों तक अपने पास नहीं रखेंगे।
एक विशेष साक्षात्कार में अरूप चक्रवर्ती ने अपने इस फैसले के पीछे की वजहों का खुलासा करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और पार्टी के मौजूदा हालातों पर खुलकर अपनी भड़ास निकाली।
"हार के बाद पद से चिपके रहने की शिक्षा ममता दीदी ने नहीं दी"
इस्तीफे की मुख्य वजह बताते हुए अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से दूर कर दिया है। जनता का यह जनादेश उनके इस फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा म्यूनिसिपल अकाउंट्स कमेटी की बैठकें लंबे समय से नहीं हो रही थीं। अरूप ने कहा, "जब इस पद पर रहकर कोई काम ही नहीं हो रहा है, तो बेकार में पद से चिपके रहने का कोई मतलब नहीं है। पद से चिपके रहने की शिक्षा हमें ममता बनर्जी ने नहीं दी है।"
ममता बनर्जी के आस-पास रहने वाले 'घेरे' पर साधा निशाना
टीएमसी की स्थापना के समय से पार्टी से जुड़े अरूप चक्रवर्ती ने पुराना दर्द बयां करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की पार्टी नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया, "पार्टी के कम से कम 70 फीसदी विधायकों के पास ममता बनर्जी का पर्सनल नंबर तक नहीं था। ममता दीदी तो जमीन से जुड़ी नेता हैं, मैं उन्हें दोष नहीं दूंगा। लेकिन उनके आस-पास जो घेरा (कोट्री) बनाकर लोग बैठे थे, उन्होंने दूसरों को मदी दीदी तक पहुंचने क्यों नहीं दिया? सिर्फ इसलिए ताकि उनकी खुद की मौरसीपट्टा (चौधराहट) खत्म न हो जाए।"
आरजी कर कांड, भ्रष्टाचार और सरकार के फैसलों की कड़े शब्दों में आलोचना
अरूप चक्रवर्ती ने साक्षात्कार के दौरान अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार के कई फैसलों की कड़ी आलोचना की:
मेट्रो काम रोकना: चिंड़ीहाटा में मेट्रो रेल के काम को रोकने के लिए टीएमसी सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी, जबकि नई सरकार ने आते ही 5 दिनों में वह काम शुरू करवा दिया। वहां कोर्ट जाने की कोई जरूरत नहीं थी।
आरजी कर कांड: आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई दुष्कर्म और हत्या की घटना के कारण महिला वोटबैंक टीएमसी से पूरी तरह छिटक गया। तत्कालीन प्रिसिंपल संदीप घोष को घटना के बाद तुरंत दूसरी जगह पोस्टिंग देना सरकार की बहुत बड़ी भूल थी।
बॉयकाट कल्चर: पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिका द्वारा माकपा (CPM) नेताओं के सामाजिक बहिष्कार (शादियों में न जाने) के फरमान की आलोचना करते हुए अरूप ने कहा कि इस 'बॉयकाट कल्चर' ने पार्टी का भारी नुकसान किया।
पतन का कारण: भ्रष्टाचार ने पार्टी के वोट बैंक को तबाह कर दिया। इसके साथ ही महिला और मुस्लिम वोट बैंक में लगी सेंध भी टीएमसी के पतन की बड़ी वजह बनी।
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर उठाया सवाल, शुभेंदु सरकार की तारीफ की
अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर अरूप ने दो टूक कहा, *"अभिषेक ने राजनीति की जो नई कार्यप्रणाली (Methodology) तैयार की थी, वह पूरी तरह फेल साबित हुई है। एक राष्ट्रनेता बनने के लिए शब्दों का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है। चुनाव के बाद 'डीजे बजाने' या 'श्मशान में चिता तैयार रखने' जैसे बयान एक कैडर दे सकता है, कोई जननेता नहीं।" उन्होंने आगे कहा, "ममता बनर्जी आज इसलिए इस ऊंचे पद पर हैं क्योंकि उन्होंने राजनीति में मार खाई है, खून बहाया है। शुभेंदु अधिकारी भी पैराशूट से नहीं उतरे हैं। अगर अभिषेक को नेता बनना है, तो उन्हें कठिन समय में कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर मार खानी होगी।"
दिलचस्प बात यह है कि अरूप चक्रवर्ती ने राज्य की मौजूदा शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि शुभेंदु सरकार प्रशासनिक बैठकों में विपक्षी जनप्रतिनिधियों को भी सम्मानपूर्वक बुला रही है, जो कि स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर मैं शुभेंदु अधिकारी के अच्छे काम की तारीफ करूंगा, तो लोग तुरंत कहेंगे कि मैं बीजेपी में जा रहा हूं।"