कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता के बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र के कुलिया टांगरा इलाके में कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के एक पार्टी कार्यालय से बड़ी संख्या में आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड बरामद होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और स्थानीय लोगों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पार्टी कार्यालय खोलते ही सामने आया चौंकाने वाला मामला
घटना बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र के 6/1 कुलिया टांगरा सेकेंड लेन की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कार्यालय लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। बताया गया कि आगामी शीतला पूजा के लिए पूजा समिति का सामान निकालने और सफाई के उद्देश्य से बुधवार शाम कार्यालय खोला गया था। इसी दौरान कार्यालय के अंदर रखी अलमारी खोलने पर बड़ी संख्या में आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड मिलने का दावा किया गया। खबर फैलते ही इलाके में भारी भीड़ जुट गई और लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
मामले को लेकर स्थानीय निवासियों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं, फॉर्म भरने और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर उनसे विभिन्न समय में ये जरूरी कागजात लिए गए थे, लेकिन काम पूरा होने के बाद उन्हें वापस नहीं लौटाया गया। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि उनके असली दस्तावेज उनके घर पर मौजूद हैं, बावजूद इसके उन्हीं नामों के अन्य कार्ड कथित तौर पर कार्यालय से बरामद हुए हैं, जिससे ‘डुप्लिकेट दस्तावेज’ को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मृत लोगों और स्थानीय नेताओं के दस्तावेज मिलने का दावा
स्थानीय लोगों का दावा है कि बरामद दस्तावेजों में कई मृत व्यक्तियों के कार्ड भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, कुछ प्रभावशाली स्थानीय तृणमूल नेताओं और एक पार्षद से जुड़े दस्तावेज मिलने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
BJP ने कार्यालय पर कब्जे का किया दावा
घटना के बाद विवादित कार्यालय को लेकर राजनीतिक तनातनी भी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि उसने इस कार्यालय को अपने नियंत्रण में ले लिया है और वहां पार्टी का झंडा भी फहरा दिया गया है।
आधिकारिक जांच और पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रशासन या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दस्तावेजों की सत्यता, संख्या और बरामदगी के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच और गरमा सकता है।