पांडवेश्वर: युधिष्ठिर घोष इलाके में कोयला और बालू का एक बड़ा कारोबारी माना जाता है। आरोप है कि लेफ्ट शासन के दौरान उसने अवैध गतिविधियों की शुरुआत की और बाद में राज्य में तृणमूल सरकार के कार्यकाल में अपने रेत और कोयला तस्करी के नेटवर्क को तेजी से विस्तार दिया। कम समय में ही उसने करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली और कई लग्जरी संपत्तियों, जमीनों और महंगी गाड़ियों का मालिक बन गया। आरोपों के बावजूद लंबे समय तक किसी भी सरकार द्वारा उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अवैध खनन का आरोप
युधिष्ठिर घोष पर खुले कोयला खदानों से अवैध खनन और नदियों से रेत चोरी कर उसे राज्य के विभिन्न हिस्सों में बेचने का गंभीर आरोप है। स्थानीय स्तर पर उसे ‘कोयला और रेत एम्पायर का बादशाह’ तक कहा जाने लगा था। बताया जाता है कि उसने पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कारोबार के दम पर बड़ी संपत्ति खड़ी की। इसके अलावा उस पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी और दुर्व्यवहार के भी आरोप लगाए गए हैं।
ईडी की छापेमारी और गिरफ्तारी
युधिष्ठिर घोष के खिलाफ कोयला और रेत के अवैध खनन व मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पहले से जांच कर रहा है और उससे कई बार पूछताछ भी की जा चुकी है। गुरुवार को उसे पांडवेश्वर थाने में वर्ष 2002 में दर्ज एससी/एसटी एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं 379, 411 और 413 के मामले में गिरफ्तार किया गया। जीआर केस नंबर 475/2002 में अदालत द्वारा वारंट जारी होने के बाद यह कार्रवाई हुई। गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को उसे दुर्गापुर महकमा अदालत में पेश किया गया।