कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत जैविक माता-पिता की पहचान डीएनए जांच से स्थापित होने के बावजूद एक बच्चे को ‘परित्यक्त’ घोषित कर दत्तक ग्रहण के लिए उपलब्ध कराया गया था। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी बच्चे को दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जैविक माता-पिता को उचित सुनवाई का अवसर देना जरूरी है।
नाले के पास मिला था नवजात
मामला 23 मार्च 2024 का है। कोलकाता के माणिकतला इलाके में एक नवजात गंभीर हालत में नाले के पास मिला था। स्थानीय लोगों की मदद से उसे आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद रितम दास और अस्मिता पोद्दार ने अस्पताल पहुंचकर बच्चे को अपना बताया। पुलिस जांच में सामने आया कि अस्मिता की मां लक्ष्मी पोद्दार ने पारिवारिक और अंतर-जातीय विवाद के चलते कथित तौर पर नवजात को वहां छोड़ दिया था। जांच में अस्मिता की इस घटना में किसी आपराधिक भूमिका का पता नहीं चला।
DNA जांच ने साफ कर दी जैविक पहचान
बच्चे की पहचान को लेकर विवाद के बीच CWC के निर्देश पर डीएनए जांच कराई गई। रिपोर्ट में अस्मिता पोद्दार और रितम दास को बच्चे के जैविक माता-पिता के रूप में पुष्टि की गई। इसके बावजूद CWC ने 18 नवंबर 2024 को बच्चे को ‘परित्यक्त’ और उसके माता-पिता को उसकी देखभाल के लिए ‘असमर्थ’ घोषित कर दिया। इसके बाद बच्चे को दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया में आगे बढ़ाने के लिए संबंधित एजेंसी को निर्देश दिया गया। बच्चे की जैविक मां ने इस आदेश को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी।
HC ने CWC की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि CWC ने किशोर न्याय अधिनियम की आवश्यक प्रक्रियाओं का पर्याप्त रूप से पालन नहीं किया था।
अदालत के अनुसार:
- आवश्यक Social Investigation Report तैयार नहीं की गई थी।
- माता-पिता को बच्चे की देखभाल के लिए शारीरिक, मानसिक या आर्थिक रूप से असमर्थ साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं रखा गया।
- जैविक मां को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया।
अदालत ने माना कि केवल परिस्थितियों के आधार पर बच्चे को ‘परित्यक्त’ घोषित करना पर्याप्त नहीं है, खासकर तब जब डीएनए जांच जैविक माता-पिता की पहचान की पुष्टि कर चुकी हो।
बच्चे को CWC के समक्ष पेश करने का निर्देश
हाई कोर्ट ने दत्तक माता-पिता को बच्चे को तत्काल कोलकाता CWC के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही CWC को जैविक माता-पिता को सुनवाई का पूरा अवसर देने, संबंधित जांच एजेंसी से आवश्यक रिपोर्ट लेने और कानून के अनुरूप नए सिरे से निर्णय करने को कहा गया। अदालत ने नई प्रक्रिया पूरी कर चार सप्ताह के भीतर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के साथ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे की स्थिति तय करते समय केवल प्रशासनिक प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि जैविक माता-पिता के अधिकार और बच्चे के सर्वोत्तम हित को भी कानून के अनुसार ध्यान में रखना होगा।