सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी में नौकरी जालसाजी रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी हरेंद्र कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शनिवार सुबह सिलीगुड़ी के हायदेरपाड़ा इलाके में एक किराए के मकान पर छापेमारी कर पकड़ा गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह करीब एक साल से अपनी पहचान छिपाकर उसी इलाके में रह रहा था।
GDS भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़े का खुलासा
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती प्रक्रिया में जालसाजी से जुड़ा है। आरोप है कि चार अभ्यर्थियों से उनकी माध्यमिक परीक्षा की मार्कशीट लेकर उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया और बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए गए। डाक विभाग की जांच में जब इन नियुक्ति पत्रों की सत्यता की जांच हुई तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए, जिसके बाद मामला उजागर हुआ और शिकायत दर्ज की गई।
2021 में हुई थी फर्जी नियुक्ति, जांच में सामने आए अहम तथ्य
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 के अक्टूबर माह में इन चार अभ्यर्थियों को कथित रूप से ग्रामीण डाक सेवक के पद पर नियुक्त दिखाया गया था, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया कागजों पर आधारित फर्जीवाड़ा थी। सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी और आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी।
छापेमारी के बाद गिरफ्तारी, कोर्ट ने दी ट्रांजिट रिमांड
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सिलीगुड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने उसे पांच दिनों की ट्रांजिट रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया है। अधिकारियों के अनुसार, रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में पूछताछ की जाएगी। मामले में यह भी जांच का विषय है कि क्या इस जालसाजी में और लोग भी शामिल थे।
स्थानीय स्तर पर पहचान छिपाकर रह रहा था आरोपी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आरोपी खुद को पुराना कार व्यवसायी बताकर इलाके में रह रहा था और सामान्य जीवन जी रहा था। मकान मालिक ने बताया कि वह नियमित रूप से किराया देता था और किसी तरह का संदेह पहले कभी सामने नहीं आया। सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने फरारी के दौरान किन-किन स्थानों पर संपर्क बनाए रखे थे और क्या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।