नई दिल्ली/कोलकाता: देश में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET-UG) में हुई कथित धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर 'तेलापोका जनता पार्टी' (ककरोच जनता पार्टी - CJP) के बैनर तले छात्रों और युवाओं का आंदोलन शनिवार (11 जुलाई, 2026) को 22वें दिन भी जारी रहा।
इस आंदोलन का चेहरा बने विख्यात शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज 14वें दिन में प्रवेश कर गई है। वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, भूख हड़ताल के कारण उनका वजन अब तक 7.5 किलोग्राम घट चुका है और उनका ब्लड प्रेशर 106/74 mm Hg रिकॉर्ड किया गया है।

'मैं कोई आधुनिक गांधी या हीरो नहीं' - सोनम वांगचुक
सोशल मीडिया (X) पर जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि वह बीते दिनों की तुलना में थोड़ा थका हुआ महसूस कर रहे हैं, लेकिन छात्रों के हक की इस लड़ाई के लिए उनकी प्रतिबद्धता कम नहीं हुई है। उन्होंने खुद को 'आधुनिक गांधी' या 'हीरो' कहे जाने पर असहजता जताई। वांगचुक ने भावुक अपील करते हुए कहा:
"मैं कोई गांधी या हीरो नहीं हूँ, बल्कि अपने नागरिक कर्तव्यों को निभाने वाला एक आम इंसान हूँ। दूसरों में हीरो मत तलाशिए, बल्कि अपने जीवन के हीरो खुद बनिए। देश के छात्रों की आत्महत्याओं पर चुप मत रहिए। अगर आज आप दिल्ली नहीं आ सकते, तो देश में जहां भी हैं, वहीं से एक दिन का उपवास रखकर छात्रों की आवाज बनिए।"
उन्होंने देशवासियों से 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होने का भी आह्वान किया है।
वांगचुक को मिला वामपंथी छात्र संगठन (SFI) का साथ
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को गति देने के लिए वामपंथी छात्र संगठन 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (SFI) के राष्ट्रीय नेतृत्व ने धरना मंच का दौरा किया। एसएफआई (SFI) की राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐशे घोष, राज्य नेता सृजन भट्टाचार्य और आदर्श एम. साजी ने सोनम वांगचुक और सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके से मुलाकात कर एकजुटता का संदेश दिया।
सृजन भट्टाचार्य ने कोलकाता और दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल कुछ छात्रों का नहीं, बल्कि देश के शिक्षा तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और भाजपा सरकार के खिलाफ युवा पीढ़ी के बढ़ते आक्रोश का प्रतीक है। इससे पहले, 9 जुलाई को इसी मांग के समर्थन में SFI ने कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट सहित देश के 100 से अधिक स्थानों पर प्रतीकात्मक भूख हड़ताल भी की थी।
बिजली-पानी काटने का आरोप, पुलिस से तकरार
आंदोलन के शुरुआती दौर में ककरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। दीपके के मुताबिक, पुलिस ने दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बावजूद धरना खाली न करने पर प्रदर्शन स्थल के शौचालयों में पानी की सप्लाई बंद कर दी थी और बिजली काट दी थी। हालांकि, बाद में भारी विरोध के बाद पुलिस को बुनियादी सुविधाएं बहाल करनी पड़ीं। दीपके ने देश भर के किसानों से भी अपील की है कि वे दिल्ली आकर छात्रों के इस आंदोलन को और मजबूत करें।