कोलकाता: अभिनेता और सांसद देव के कोलकाता स्थित घर पर गणेश पूजा के मौके पर राजनीतिक सौहार्द की तस्वीर देखने को मिली। सुबह से ही देव के घर आयोजित गणेश पूजा में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया। शाम को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी देव के घर पहुंचे और पूजा में शामिल हुए।
देव और परिवार के साथ सुवेंदु की मुलाकात
शुभेंदु अधिकारी ने देव और उनके परिवार से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई और साथ में तस्वीरें भी खिंचवाई गईं। देव के साथ शुभेंदु अधिकारी को सहज अंदाज में बातचीत और चर्चा करते हुए देखा गया। पूजा के दौरान उन्होंने भोग भी ग्रहण किया।

सुबह देव के घर पहुंचे सुकांत मजूमदार
इससे पहले सुबह बालुरघाट से बीजेपी सांसद और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार देव के घर पहुंचे थे। उन्होंने गणेश पूजा में हिस्सा लिया और देव से मुलाकात की। सुकांत की मौजूदगी ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा को जन्म दिया।
‘दादा-भाई’ के रिश्ते को बताया वजह
सुकांत मजूमदार ने अपनी मौजूदगी को पूरी तरह से शिष्टाचार भेंट बताया। बीजेपी सांसद के मुताबिक, देव से उनका पुराना परिचय है और दोनों के बीच दादा-भाई जैसा रिश्ता है। इसी रिश्ते की वजह से वह देव के घर गणेश पूजा में शामिल होने पहुंचे थे।
कुणाल घोष भी पूजा में हुए शामिल
देव के घर आयोजित गणेश पूजा में तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष भी नजर आए। एक ही आयोजन में बीजेपी और तृणमूल से जुड़े नेताओं की मौजूदगी ने गणेश पूजा को राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना दिया।
कई वर्षों से गणेश पूजा करते हैं देव
देव पिछले कई वर्षों से अपने कोलकाता स्थित घर पर धूमधाम से गणेश पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं। इस साल भी सोमवार से उनके घर गणेश पूजा का आयोजन शुरू हुआ। पूजा के लिए राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों को आमंत्रित किया गया था।

एक ही मंच पर अलग-अलग राजनीतिक चेहरे
देव के घर गणेश पूजा के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं की मौजूदगी ने एक बार फिर राजनीतिक सौहार्द की तस्वीर पेश की। देव और उनके परिवार के साथ नेताओं की मुलाकात और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन सकती हैं।
शिष्टाचार या कोई सियासी संदेश?
हालांकि देव पहले भी राजनीतिक विरोधियों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करते नजर आए हैं। ऐसे में सुकांत मजूमदार, कुणाल घोष और सुवेंदु अधिकारी की देव के घर मौजूदगी को सिर्फ शिष्टाचार माना जाए या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश भी है, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।