कोलकाता: सोने के व्यापारी से जुड़े चर्चित हत्या मामले में गिरफ्तार पूर्व बीडीओ प्रशांत बर्मन को बारासात अदालत से देर रात जमानत मिलने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। अदालत में समय पर जरूरी दस्तावेज जमा न होने के कारण आरोपी को राहत मिलने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस पर गंभीर आरोप, दिलीप घोष ने जताया गुस्सा
ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का एक वर्ग आरोपी के साथ मिलीभगत कर रहा है। दिलीप घोष ने कहा कि कुछ लोगों की “पुरानी आदतें” अब तक नहीं बदली हैं और कानून के डर के बिना आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन लोगों की पुलिस तलाश कर रही है, वही लोग शाम को पुलिसकर्मियों के साथ बैठकर बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। मंत्री ने साफ कहा कि अगर प्रशासन सख्त नहीं हुआ तो गवाहों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है।
गवाह की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
मामले के मुख्य गवाह शमीम अहमद को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। आरोप है कि शमीम ने फेसबुक लाइव के जरिए पूरे घटनाक्रम को सामने लाया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। लेकिन आरोपी को इतनी जल्दी जमानत मिलने के बाद अब गवाह की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
दिलीप घोष ने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य में अपराधियों को खुली छूट नहीं दी जाएगी और जरूरत पड़ी तो पुराने मामलों की फाइलें भी दोबारा खोली जा सकती हैं। उन्होंने आरजी कर मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अगर पुरानी जांच फिर शुरू हो सकती है, तो कई बड़े मामलों में नई कार्रवाई भी संभव है।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि पूर्व बीडीओ प्रशांत बर्मन ने न्यूटाउन इलाके में नशे की हालत में गाड़ी चलाते हुए एक पैदल यात्री को टक्कर मार दी थी। घटना के बाद वह मौके से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।