कोलकाता/सॉल्टलेक। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में सॉल्टलेक में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलाभूमियों की सुरक्षा और प्लास्टिक के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए केवल सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करना काफी नहीं है, बल्कि इसके प्रति वास्तविक संवेदनशीलता और व्यवहार में बदलाव जरूरी है।
धापा और जलाशयों में जाकर मनाया पर्यावरण दिवस
मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि उन्होंने दिन की शुरुआत धापा क्षेत्र और मछली पालन से जुड़े जलाशयों का दौरा कर की। उन्होंने कहा कि राज्य में जल, जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में आर्द्रभूमियों और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण का सीधा संबंध हमारी जीवनशैली और खानपान से जुड़ा हुआ है। यदि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, तो मानव अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो सकता है।
प्लास्टिक मुक्त समाज बनाने की अपील
दिलीप घोष ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत व्यक्तिगत स्तर से होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि गांवों में प्लास्टिक के प्रवेश पर रोक लगाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। उनके अनुसार, जब तक लोग अपनी आदतों में बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
काकली घोष दस्तिदार के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकली घोष दस्तिदार के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी मंत्री से सवाल किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कहा कि अब तृणमूल कांग्रेस की बातों को छोड़कर राज्य के भविष्य और विकास पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के विकास और नई योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना अधिक महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण और राजनीति दोनों पर दिया संदेश
मंत्री का बयान एक ओर पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त समाज की दिशा में जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच विपक्षी दलों की आंतरिक खींचतान से ऊपर उठकर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की बात भी सामने रखता है।