कोलकाता: पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और सत्ता के रसूख के खिलाफ आम जनता का गुस्सा अब सड़कों पर फूटने लगा है। कोलकाता के एंटाली (Entally) इलाके में गुरुवार सुबह उस वक्त भारी तनाव फैल गया, जब जबरन वसूली (तोलाबाजी), डराने-धमकाने और अवैध रूप से जमीन व फ्लैट कब्जा करने के गंभीर आरोपों को लेकर स्थानीय निवासियों ने पूर्व टीएमसी विधायक स्वर्णकमल साहा और उनके बेटे व वर्तमान विधायक संदीपान साहा के घर का घेराव कर दिया। सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में जुटे लोगों ने दोनों नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उग्र प्रदर्शन किया।
पिता-पुत्र पर पूरे इलाके को लूटने का आरोप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पूर्व विधायक स्वर्णकमल साहा और उनके बेटे संदीपान साहा के जुल्मों से पूरा एंटाली इलाका लंबे समय से त्रस्त है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब संदीपान साहा केवल पार्षद (कौंसिलर) थे, तभी से उनकी दबंगई और अत्याचार शुरू हो गया था, जो उनके विधायक बनने के बाद और बढ़ गया।
जनता ने लगाए ये गंभीर आरोप:
कई इलाकों में बन रहे नए फ्लैट्स और मकानों पर जबरन कब्जा करना और बिल्डरों को पैसे न देना।
छोटे-बड़े व्यापारियों और आम लोगों से जबरन भारी 'तोला' (वसूली) वसूलना।
नौकरी या अन्य काम का झूठा झांसा देकर लोगों से मोटी रकम ऐंठना।
प्रियंका टिबरेवाल भी प्रदर्शन में शामिल, कड़े एक्शन की मांग
गुरुवार सुबह करीब पौने आठ बजे ही पीड़ित लोगों की भारी भीड़ दोनों टीएमसी नेताओं के घर के बाहर जुटने लगी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और हालात बेकाबू होने लगे। इस बीच, एंटाली क्षेत्र से बीजेपी की उम्मीदवार रहीं वरिष्ठ नेता प्रियंका टिबरेवाल भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गईं। उन्होंने पीड़ित स्थानीय निवासियों से बात की और उनके संघर्ष को अपना समर्थन दिया।
नेताओं ने साधी चुप्पी: जनता के इस भारी आक्रोश और घर के बाहर हो रहे उग्र प्रदर्शन के बावजूद न तो स्वर्णकमल साहा और न ही संदीपान साहा में से कोई भी बाहर आया। दोनों ही नेताओं ने घर के अंदर खुद को बंद रखा और जनता का सामना करने से बचते दिखे।
सुरक्षा के लिए तैनात किए गए केंद्रीय बल
हालात की गंभीरता और बढ़ते तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल के साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Central Forces) के जवानों को तैनात किया गया है। सुरक्षा बल लगातार स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खबर लिखे जाने तक स्थानीय लोगों का प्रदर्शन और आक्रोश दोनों नेताओं के घर के बाहर जारी है।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार के कड़े रुख और भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य जैसे दिग्गजों के बयानों के बीच, टीएमसी के इन रसूखदार नेताओं के खिलाफ जनता का यह सीधा विद्रोह बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की ओर इशारा कर रहा है।