कोलकाता - पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और चार बार के सांसद कल्याण बनर्जी के ताजा बयान ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। कल्याण बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया है। यह मामला कथित रूप से विधायकों के हस्ताक्षर मिलान और सीआईडी समन से जुड़ा हुआ है, जिसमें अदालत में सुनवाई भी चल रही थी।
अदालत में अनुपस्थित रहने से बढ़ी चर्चा
जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी अदालत में मौजूद नहीं थे। इस दौरान उनके स्थान पर अन्य वकीलों ने पक्ष रखा। इसके बाद यह मामला राजनीतिक से ज्यादा व्यक्तिगत विवाद के रूप में देखा जाने लगा। कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर व्यवहार और नेतृत्व शैली को लेकर गहरी नाराजगी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।
‘अभिषेक या मैं’ का अल्टीमेटम
सबसे बड़ा बयान तब सामने आया जब कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधा संदेश देते हुए कहा कि उन्हें पार्टी में “अभिषेक बनर्जी या उनके जैसे वफादार नेताओं” में से किसी एक को चुनना होगा। इस पूरे घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर गहराते मतभेदों को फिर से उजागर कर दिया है। लगातार नेताओं के असंतोष और आरोपों से पार्टी नेतृत्व के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिख रही है।
आगे की राजनीति पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह विवाद और बढ़ता है, तो इसका असर आने वाले चुनावों और पार्टी की संगठनात्मक एकता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर ममता बनर्जी के अगले कदम पर टिकी हुई है।