कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार के नगर पालिका मामलों के विभाग ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए कोलकाता नगर निगम (KMC) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इसके साथ ही निगम की निर्वाचित व्यवस्था समाप्त हो गई है और अब निगम का संचालन प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा।

स्मिता पांडे को बनाया गया प्रशासक
राज्यपाल के आदेश के बाद म्युनिसिपल कमिश्नर स्मिता पांडे को कोलकाता नगर निगम का प्रशासक (Administrator) नियुक्त किया गया है। नई निर्वाचित नगर परिषद के गठन तक या अधिकतम छह महीने की अवधि तक वह निगम की सभी शक्तियों और जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगी।
मेयर, चेयरमैन और सभी समितियों के पद हुए समाप्त
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, निगम के भंग होते ही मेयर, चेयरमैन, मेयर-इन-काउंसिल और विभिन्न स्थायी समितियों के सभी पद स्वतः रिक्त हो गए हैं। अब तक निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा लिए जाने वाले सभी प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय प्रशासक के अधिकार क्षेत्र में होंगे।
कानून की धारा 117 और 118 के तहत कार्रवाई
यह फैसला कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 117 और धारा 118 के तहत लिया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निगम के सभी अधिकार और कर्तव्य अब प्रशासक द्वारा निभाए जाएंगे, ताकि नागरिक सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।
नागरिक सेवाएं रहेंगी जारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोलकाता नगर क्षेत्र में जलापूर्ति, सफाई, सड़क मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं का संचालन पहले की तरह जारी रहेगा। स्मिता पांडे को तत्काल प्रभाव से निगम का कार्यभार संभालने का निर्देश दिया गया है।