कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद अब प्रशासनिक सख्ती जमीन पर दिखाई देने लगी है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत रविवार को कोलकाता के कई इलाकों में अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा बुलडोजर अभियान शुरू किया गया। नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में तिलजला, कसबा और बेलेघाटा में कार्रवाई की।
तिलजला, कसबा और बेलेघाटा में टूटी बहुमंजिला इमारतें
कोलकाता नगर निगम की टीम ने उन बहुमंजिला इमारतों को निशाने पर लिया, जिन पर बिना अनुमति निर्माण और नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। प्रशासन के मुताबिक इन इमारतों को लेकर पहले नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्धारित समय के भीतर जवाब या वैध दस्तावेज नहीं दिए गए। इसके बाद निगम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
TMC नेताओं से जुड़े होने के आरोप से बढ़ी सियासी हलचल
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिन इमारतों पर कार्रवाई हुई है, उनमें कुछ निर्माणों के तार तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रभावशाली नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष का आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान राजनीतिक संरक्षण में अवैध निर्माण का नेटवर्क तेजी से बढ़ा।
मंत्री अग्निमित्रा पाल ने किया दौरा
कसबा इलाके में चल रही कार्रवाई का निरीक्षण करने राज्य की शहरी विकास एवं नगर पालिका मामलों की मंत्री Agnimitra Paul भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने निगम अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की बात कही।
पूर्व सरकार पर साधा निशाना
मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और पूर्व शहरी विकास मंत्री Firhad Hakim पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े अवैध निर्माण आखिर प्रशासन की नजरों से कैसे बचते रहे। उन्होंने कहा कि केवल प्रमोटरों ही नहीं, बल्कि मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।
निगम अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई कोलकाता नगर निगम अधिनियम 1980 की धारा 400(1) के तहत की गई है। नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद निगम ने बुलडोजर अभियान चलाने का फैसला लिया। प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।