कोलकाता: पश्चिम बंगाल की विश्वप्रसिद्ध दुर्गापूजा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी से जुड़े एक संगठन पर यूनेस्को के नाम और प्रतिष्ठा का इस्तेमाल कर कथित तौर पर वीआईपी पास बेचने तथा वित्तीय अनियमितता करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में कोलकाता पुलिस आयुक्त, डीजीपी और बहूबाजार थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता और अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल कंसल्टेंट जयदीप मुखर्जी का आरोप है कि वर्ष 2022 में गठित एक संस्था ने स्वयं को यूनेस्को से जुड़ा या उसका आधिकारिक सहयोगी बताकर कोलकाता की चुनिंदा दुर्गापूजाओं के लिए विशेष "प्रिव्यू शो" आयोजित किए। इन आयोजनों के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 4,000 रुपये तक के वीआईपी टिकट और पास बेचे गए।
आम लोगों की एंट्री सीमित करने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि प्रिव्यू शो के दौरान कई प्रमुख पूजा पंडालों में आम श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की आवाजाही सीमित कर दी जाती थी। आरोप है कि केवल टिकटधारकों को विशेष प्रवेश दिया जाता था, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष और कई स्थानों पर विवाद की स्थिति पैदा हुई।
यूनेस्को के नाम के दुरुपयोग का आरोप
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि आयोजन के प्रचार-प्रसार में यूनेस्को के नाम और पहचान का उपयोग किया गया। आरोप है कि इस माध्यम से आम लोगों से धन एकत्र किया गया और सांस्कृतिक आयोजन को व्यावसायिक गतिविधि में बदल दिया गया। शिकायत में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और जनता के साथ कथित धोखाधड़ी बताया गया है।

एफआईआर दर्ज करने की मांग
मामले में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी और संबंधित संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण वित्तीय तथ्यों का खुलासा हो सकता है।
दुर्गापूजा की वैश्विक प्रतिष्ठा पर भी चिंता
शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि यदि यूनेस्को के नाम का गलत इस्तेमाल और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो कोलकाता दुर्गापूजा की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है। गौरतलब है कि कोलकाता दुर्गापूजा को यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) की सूची में शामिल किया है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। पुलिस अथवा संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या नियमों का उल्लंघन हुआ है।