नदिया (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में सोमवार, 31 अगस्त 2026 से निजी बस सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गई हैं। नदिया जिला बस मालिक एवं चालक संगठन ने ई-रिक्शा (टोटो), कथित अवैध ऑटो और इंजन वैन के बढ़ते संचालन के विरोध में हड़ताल का ऐलान किया है। सुबह से ही जिले के प्रमुख मार्गों पर निजी बसें नहीं चलने के कारण दैनिक यात्रियों, छात्रों और दूरदराज के इलाकों से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बस संगठन ने प्रशासन से अवैध वाहनों के संचालन पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
प्रमुख बस रूटों पर पूरी तरह प्रभावित हुआ यातायात
हड़ताल का असर नदिया जिले के कई महत्वपूर्ण रूटों पर देखने को मिला। कृष्णनगर, रानाघाट, कालना घाट, करीमपुर, पलाशी, नवद्वीप और दत्तपुलिया समेत कई इलाकों में निजी बसें सड़कों से गायब रहीं। करीमपुर, मजदिया और हंसखाली के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। इन इलाकों के कई गांवों में निजी बसें ही लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन हैं।
टोटो और ऑटो के खिलाफ क्यों नाराज हैं बस मालिक?
बस संगठन का आरोप है कि प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के बावजूद कई टोटो, ऑटो और बैटरी से चलने वाले वाहन राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लगातार संचालित हो रहे हैं। बस मालिकों और चालकों का कहना है कि इन वाहनों के कारण बसों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। इसके अलावा बस स्टैंड और निर्धारित बस रूट के आसपास यात्रियों को लेकर आए दिन विवाद की स्थिति भी पैदा होती है।
यात्रियों को बस स्टैंड से ही उठा ले जाने का आरोप
बस कर्मियों का आरोप है कि कुछ टोटो और ऑटो चालक बस स्टैंड के आसपास से ही यात्रियों को अपने वाहनों में बैठा लेते हैं। इससे बस चालकों और ऑटो-टोटो चालकों के बीच अक्सर कहासुनी और विवाद की स्थिति बनती है। बस संगठन का कहना है कि यदि राजमार्गों और प्रमुख बस रूटों पर ऐसे वाहनों के संचालन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो निजी बस सेवा को आर्थिक रूप से चलाना लगातार मुश्किल होता जाएगा।
बसों की संख्या घटने का भी दावा
संगठन के अनुसार, नदिया जिले में निजी बसों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम होकर करीब 500 रह गई है। बस मालिकों का कहना है कि यात्रियों की संख्या घटने के बावजूद ईंधन, चालक-परिचालक के वेतन, रखरखाव और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि मौजूदा परिस्थितियों में कई बस संचालकों के लिए रोजाना का परिचालन खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
यात्रियों पर पड़ा सीधा असर
अचानक बस सेवा बंद होने से जिले के हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। रोजाना काम या पढ़ाई के लिए बस से यात्रा करने वाले लोगों को वैकल्पिक परिवहन का सहारा लेना पड़ रहा है। एक यात्री ने बताया कि कृष्णनगर जाने के लिए बस का किराया करीब ₹45 था, लेकिन बस सेवा बंद होने के बाद टोटो चालक कथित तौर पर उसी यात्रा के लिए ₹120 से ₹125 तक मांग रहे हैं। इससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सड़क सुरक्षा को लेकर भी उठाए सवाल
बस संगठन ने अवैध या अनियंत्रित ई-रिक्शा और ऑटो के राजमार्गों पर संचालन को सड़क सुरक्षा से भी जोड़ा है। संगठन का दावा है कि तेज रफ्तार यातायात वाले मार्गों पर ऐसे वाहनों की मौजूदगी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति और संबंधित वाहनों के परमिट या संचालन की वैधता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मांग पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल
बस मालिक एवं चालक संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन द्वारा उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई किए जाने तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। संगठन की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर नियमों के विपरीत संचालित हो रहे टोटो, ऑटो और अन्य वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि निजी बसों का परिचालन सुचारु रूप से जारी रह सके। फिलहाल अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण नदिया में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित है और यात्रियों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।