दार्जिलिंग: दार्जिलिंग के सांसद (भाजपा) राजू बिष्ट ने उत्तर बंगाल के बंद चाय बागानों को लेकर कहा है कि हर बागान की स्थिति की “फैक्ट-फाइंडिंग जांच” की जाएगी और सभी समस्याओं की विस्तृत समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर बंगाल के चाय उद्योग में गंभीर संकट गहराता जा रहा है।
उत्तर बंगाल में 18 चाय बागान बंद, 50 से अधिक में संकट
उत्तर बंगाल में लगभग 300 चाय बागानों में से करीब 18 पूरी तरह बंद हैं, जिनमें अधिकतर दार्जिलिंग क्षेत्र के हैं। डुआर्स के कई बागान भी प्रभावित हैं। वहीं 50 से अधिक चाय बागानों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे उद्योग पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरी, PF और लीज नवीनीकरण न होने से बढ़ा संकट
कई बागानों में मजदूरों का PF और ग्रेच्युटी बकाया है, जबकि कई जगह मजदूरी का भुगतान भी लंबित है। 50 प्रतिशत से अधिक बागानों के लीज का नवीनीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी समझौता भी अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका है, जिससे श्रमिकों में नाराजगी बढ़ी है।
3 लाख श्रमिकों पर संकट, स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित
उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा उद्योग चाय है, जिससे लगभग 3 लाख श्रमिक जुड़े हैं। चाय बागानों के आसपास की पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था—हाट बाजार, व्यापार और परिवहन—इसी उद्योग पर निर्भर है। बंदी और अस्थिरता का सीधा असर हजारों परिवारों पर पड़ रहा है।
उत्पादन और बिक्री व्यवस्था में भी अनियमितता
सरकारी नियमों के अनुसार लगभग आधी चाय नीलामी केंद्रों के माध्यम से बेची जाती है, जबकि बाकी निजी तौर पर। लेकिन नीलामी और निजी बिक्री में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, जिससे वास्तविक उत्पादन का सही आंकड़ा स्पष्ट नहीं हो पाता।
दार्जिलिंग-डुआर्स चाय उत्पादन और गुणवत्ता का अंतर
चाय बोर्ड के अनुसार दार्जिलिंग में सालाना 6 से 9 मिलियन किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है, जबकि तराई और डुआर्स में लगभग 250 मिलियन किलोग्राम। दार्जिलिंग की चाय सुगंधित मानी जाती है, जबकि तराई-डुआर्स की चाय स्वाद में अलग होती है। हालांकि रासायनिक उपयोग के कारण निर्यात पर असर पड़ा है।
बंद और संकटग्रस्त बागानों की लंबी सूची
दार्जिलिंग के मुंडाकोटी, रंगबुक, सीडर, पेशोक, नागरी, पांडाम, चुंगथांग, धोतरे, कालेज वैली, सोम और चोंगटोंग जैसे कई बागान बंद हैं। कार्सियांग का लॉन्ग व्यू चाय बागान भी संकट में है। डुआर्स के ढेकलापाड़ा, चामुर्ची, रामझोरा और मधु जैसे बागान लंबे समय से बंद पड़े हैं।
सब्सिडी और प्रशासनिक बोझ
राज्य सरकार बंद चाय बागानों के मजदूरों को प्रति माह लगभग 1500 रुपये सहायता देती है। कई मामलों में मशीनरी चोरी होने से बागानों को फिर से शुरू करना और भी मुश्किल हो जाता है।
उद्योग संगठनों और मजदूर नेताओं की प्रतिक्रिया
टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उत्तर बंगाल सचिव सुमित घोष ने कहा कि चाय उद्योग लंबे समय से संकट में है और चाय पर्यटन में संभावनाएं हैं, लेकिन लीज समस्या अब भी गंभीर है। वहीं सीटू नेता गौतम घोष ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी 600 रुपये होनी चाहिए, जबकि वर्तमान में यह केवल 250 रुपये है।
सांसद का आश्वासन
दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट ने कहा कि बंद चाय बागानों की पूरी स्थिति की जांच कर प्रत्येक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा और उचित कदम उठाए जाएंगे।