कोलकाता: ईस्टर्न बाईपास के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में से एक, चिंगड़ीघाटा (Chingrighata) में मेट्रो परियोजना के काम में हुई अभूतपूर्व प्रगति का निरीक्षण करने खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) पहुंचे। पश्चिम बंगाल में हुए राजनीतिक उलटफेर और नई भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद, इस ठप पड़ी परियोजना को हरी झंडी मिली। इसके बाद मेट्रो अधिकारियों ने रिकॉर्ड 120 घंटे (5 दिन) के भीतर लंबित काम को पूरा कर इतिहास रच दिया।
इस बड़ी सफलता का जायजा लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कोलकाता की धरती से नाम लिए बिना पूर्ववर्ती ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "कोलकाता के लोगों के लिए मेट्रो बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद पिछली तृणमूल सरकार ने मेट्रो का काम रोक रखा था। इस तरह विकास को जानबूझकर स्तब्ध किया गया।"
कोर्ट के आदेश के बाद भी तत्कालीन सरकार ने बनाए 'बहाने'
चिंगड़ीघाটা जैसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शन पर मेट्रो पिलर के काम के लिए अगर रास्ता बंद किया गया, तो दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी होगी— इसी तर्क को सामने रखकर तत्कालीन तृणमूल सरकार ने महीनों तक इस परियोजना की अनुमति को अटकाए रखा था। यह मामला आखिरकार अदालत तक पहुंचा।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तुरंत मेट्रो काम के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामला देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक भी गया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि 'किसी भी परिस्थिति में विकास को रोका नहीं जा सकता' और राज्य को जल्द से जल्द मंजूरी देने का आदेश दिया। लेकिन आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी तत्कालीन सरकार ने कोई तत्परता नहीं दिखाई।
120 घंटे का 'मैजिक' और बेहतरीन ट्रैफिक मैनेजमेंट
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) की नई सरकार ने सत्ता संभालते ही प्राथमिकता के आधार पर चिंगड़ीघाटा में अटके मेट्रो काम को मंजूरी दे दी। अनुमति मिलते ही मेट्रो अधिकारी युद्धस्तर पर काम में जुट गए। जो काम पिछले 18 महीनों से लटका था, वह महज 120 घंटे में पूरा कर लिया गया।
इस काम के दौरान अस्थायी रूप से यातायात को डायवर्ट जरूर किया गया था, लेकिन कोलकाता पुलिस की कुशलता के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई नहीं। वैकल्पिक मार्गों से गाड़ियों का संचालन इतनी सटीकता से किया गया कि यात्रियों को किसी बड़े जाम का सामना नहीं करना पड़ा।
रेल मंत्री ने पेश किए आंकड़े: 42 साल बनाम 12 साल
निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने कोलकाता मेट्रो के इतिहास और उसकी गति को लेकर एक तुलनात्मक आंकड़ा भी पेश किया। उन्होंने कहा:
साल 1972 से अगले 42 वर्षों में: कोलकाता में केवल 28 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क का निर्माण हो सका था।
पीएम मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में: कोलकाता में रिकॉर्ड 45 किलोमीटर नई मेट्रो लाइनों का काम पूरा किया गया है।
रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कोलकाता मेट्रो को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, लेकिन पिछली सरकार ने हर कदम पर रोड़े अटकाए।
खुद TMC के पूर्व प्रवक्ता ने उठायें थे सवाल
इस मुद्दे पर राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी पूर्ववर्ती सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के आते ही जरूरी मंजूरियां दी गईं, जिसके कारण यह जटिल काम पांच दिनों में पूरा हो सका।
दिलचस्प बात यह है कि चिंगड़ीघाटा मेट्रो परियोजना को रोकने की नीति पर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि खुद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर से भी आवाज उठी थी। हाल ही में एक इंटरव्यू में तृणमूल के पूर्व प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने खुद चिंगड़ीघाटा मेट्रो मामले में पिछली सरकार के 'खामखयाली' (मनमाने) रवैये और बेवजह काम रोकने की नीति की कड़ी आलोचना की थी।साफ है कि जहां चिंगड़ीघाटा में मेट्रो काम की इस तूफानी रफ्तार ने नई सरकार के खाते में बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है, वहीं इसने पूर्ववर्ती शासकों को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।