कोलकाता - पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर उनकी ही पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों और नेताओं के अलग रुख अपनाने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
टीएमसी में अंदरूनी असंतोष की झलक
टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में नेताओं की बातों को अनसुना किया जाता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित लोगों तक सिमट कर रह गई है। उनके अनुसार, संगठन के भीतर लोकतांत्रिक चर्चा का अभाव बढ़ता जा रहा है। शताब्दी रॉय ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ममता बनर्जी के व्यवहार और कार्यशैली में बदलाव आया है।
निर्णय प्रक्रिया पर उठे सवाल
उन्होंने दावा किया कि पहले की तरह अब पार्टी में सामूहिक चर्चा नहीं होती और कई बार वरिष्ठ नेताओं की राय को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। शताब्दी रॉय ने यह भी कहा कि पार्टी में फैसले लेने से पहले नेताओं से सलाह-मशविरा नहीं किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं, उन्हें कई बार चुप रहने के लिए कहा जाता है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से बढ़ी सियासी हलचल
उन्होंने टीएमसी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। रॉय के मुताबिक, पार्टी के भीतर निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उनके लिए निराशाजनक रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे की राजनीति पर नजर
टीएमसी के भीतर उठ रहे ये सवाल आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टी संगठन और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी विपक्षी दलों के लिए भी राजनीतिक अवसर पैदा कर सकती है।